केजरीवाल जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा
केजरीवाल की जज को हटाने की अपील: जज के बच्चों से जुड़े मुद्दे ने बढ़ाई राजनीति और विवाद की आग
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक बार फिर से दिल्ली शराब घोटाला मामले में सुनवाई कर रहीं जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को हटाने की मांग की है। इस बार, केजरीवाल ने अपने हलफनामे में जज के परिवार से जुड़े गंभीर सवाल उठाए हैं, जिससे मामला और भी विवादित हो गया है। केजरीवाल का कहना है कि जस्टिस शर्मा के दोनों बच्चे, जो सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के साथ काम कर रहे हैं, उन्हें मामले की निष्पक्षता पर सवाल खड़ा करने का हक है।
केजरीवाल का हलफनामा और उसके बिंदु
अरविंद केजरीवाल ने एक नया हलफनामा दायर कर जस्टिस शर्मा पर दबाव बनाने की कोशिश की है। उनके अनुसार:
- जज के बच्चों का कनेक्शन:
- केजरीवाल ने यह आरोप लगाया कि जस्टिस शर्मा के दोनों बच्चे केंद्र सरकार के पैनल वकील हैं और तुषार मेहता द्वारा सौंपे गए मामलों पर काम कर रहे हैं। यह स्थिति हितों के टकराव का गंभीर अंदेशा उत्पन्न करती है, खासकर जब सॉलिसिटर जनरल CBI की ओर से मामले में पेश हो रहे हैं।
- राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) कनेक्शन:
- केजरीवाल ने इससे पहले 13 अप्रैल को यह मुद्दा उठाया था कि जस्टिस शर्मा चार बार RSS से जुड़े अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद के कार्यक्रमों में शामिल हो चुकी हैं। उन्होंने इसके आधार पर भी जज को मामले से हटाने की मांग की थी।
- हितों के टकराव का आरोप:
- केजरीवाल ने कहा कि यदि जज के परिवार के सदस्य सरकारी काम में लगे हैं, तो इसका सीधा असर मामले की निष्पक्षता पर पड़ेगा। उनका यह भी मानना था कि सॉलिसिटर जनरल को इस तथ्य को पहले अदालत में प्रस्तुत करना चाहिए था, न कि इसे मीडिया या सोशल मीडिया पर छोड़ दिया जाए।
- अवसर पर अपत्ति:
- केजरीवाल ने यह भी शिकायत की कि जज के हटने की अर्जी लंबित होने के बावजूद, अदालत ने प्रभावी आदेश पारित किए, जिससे उन्हें यह महसूस हुआ कि मामला पहले से तय दिशा में जा रहा था। इसके कारण उनके मन में अविश्वास और भी गहरा हो गया।
- जस्टिस शर्मा से अपील:
- केजरीवाल ने अंत में जस्टिस शर्मा से फिर से अपील की है कि वे इस संवेदनशील मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लें, ताकि किसी प्रकार के संदेह की स्थिति उत्पन्न न हो।
क्या है शराब घोटाला केस?
दिल्ली शराब घोटाला केस में केजरीवाल, उनके करीबी सहयोगी मनीष सिसोदिया और अन्य पर आरोप हैं कि उन्होंने आबकारी नीति में अनियमितताएं कीं। हालांकि, 27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने केजरीवाल और 22 अन्य आरोपियों को बरी कर दिया था, लेकिन CBI ने इस फैसले को चुनौती दी है और वर्तमान में मामला जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा के पास है।
मामले का राजनीतिक पहलू
केजरीवाल के द्वारा उठाए गए मुद्दे न केवल कानूनी हैं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील हैं। उनके आरोपों के बाद यह मामला और भी जटिल हो गया है, और अब यह देखा जाएगा कि अदालत इस विवाद पर क्या निर्णय लेती है।