मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला को वाग्देवी (सरस्वती) मंदिर-परिसर करार देते हुए सालों पुराने विवाद का फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की पीठ ने हिंदू और मुस्लिम पक्षों की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई के बाद यह निर्णय सुरक्षित रखा।
न्यायालय का निर्णय
भोजशाला परिसर को प्राकृतिक रूप से हिंदू मंदिर माना गया।
परिसर में नमाज अता करने की एएसआई द्वारा दी गई अनुमति को निरस्त किया गया।
परिसर के पर्यवेक्षण, संरक्षण और रख-रखाव का अधिकार अब भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के पास होगा।
मुस्लिम पक्ष के लिए प्रावधान
न्यायालय ने कहा कि मुस्लिम पक्ष धार जिले में मस्जिद के लिए आवेदन कर सकता है।
राज्य सरकार इस आवेदन पर कानून के अनुसार विचार करेगी।
विवाद और सुरक्षा
मुस्लिम पक्ष परिसर के कमाल मौलाना मस्जिद होने का दावा करता रहा है।
हिंदू पक्ष के वकील विष्णु जैन ने कहा कि न्यायालय ने हिंदू पक्ष का दावा स्वीकार किया और मस्जिद के लिए अलग जमीन के आवेदन का प्रावधान रखा।
फैसला आने से पहले धार और इंदौर प्रशासन ने सुरक्षा कड़ी कर दी।
शुक्रवार की नमाज को देखते हुए लगभग 1200 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया और फ्लैग मार्च किया गया।
इतिहास और पृष्ठभूमि
वर्ष 2022 में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय करने और हिंदू समाज को पूर्ण अधिकार देने के लिए याचिका दायर की थी।
हिंदू पक्ष ने इसे मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर और विद्या केंद्र बताया और एएसआई सर्वे, शिलालेख, स्थापत्य अवशेष और पूजा परंपरा का हवाला दिया।
वर्ष 2003 से परिसर में हर मंगलवार और वसंत पंचमी पर हिंदू पूजा और शुक्रवार को मुस्लिम नमाज होती रही।
एएसआई ने 2024 में 98 दिन तक वैज्ञानिक सर्वे किया और उच्चतम न्यायालय ने इस वर्ष जनवरी में वसंत पंचमी पर निर्बाध पूजा-अर्चना की अनुमति दी।