आयुष्मान योजना के तहत इलाज करने से इंकार करने वाले अस्पतालों को नोटिस, रायपुर में बड़ी कार्रवाई

आयुष्मान योजना


रायपुर में आयुष्मान योजना के तहत इलाज से इंकार करने वाले अस्पतालों को नोटिस

रायपुर, छत्तीसगढ़: आयुष्मान योजना का उद्देश्य देश के गरीब और जरूरतमंद लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है, लेकिन राजधानी रायपुर के कुछ प्रमुख अस्पतालों द्वारा इस योजना के तहत इलाज से इंकार करने की घटनाएं सामने आई हैं। इन अस्पतालों में प्रमुख नाम बालगोपाल हॉस्पिटल, रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल और श्री नारायणा हॉस्पिटल शामिल हैं। इन अस्पतालों के खिलाफ सरकार ने नोटिस जारी कर दिया है

क्या था सवाल?

छत्तीसगढ़ विधानसभा में कांग्रेस विधायक राघवेंद्र सिंह ने आयुष्मान योजना को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से पूछा कि प्रदेश में कितने आयुष्मान कार्डधारी हैं और किस मात्रा में इलाज हुआ है। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या योजना के तहत हास्पिटल्स द्वारा इलाज करने से इंकार किया गया है और क्या शिकायतें आई हैं।

मंत्री का जवाब और कार्रवाई

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने बताया कि प्रदेश में कुल 2.47 करोड़ आयुष्मान कार्डधारी हैं, और 22,59,995 लोगों का उपचार इस योजना के तहत हुआ है। इसके अलावा उन्होंने बताया कि केंद्र का हिस्सा 60% और राज्य का हिस्सा 40% होता है।

मंत्री ने यह भी कहा कि 31 शिकायतें आई थीं, जिन पर सख्त कार्रवाई की गई है। इसके तहत हॉस्पिटल्स के खिलाफ नोटिस जारी किए गए हैं और कुछ अस्पतालों पर जांच भी चल रही है। बालगोपाल हॉस्पिटल, रामकृष्ण केयर हॉस्पिटल, और श्री नारायणा हॉस्पिटल जैसे नामचीन अस्पतालों पर मरीजों का इलाज करने से मना करने की शिकायतें प्राप्त हुई थीं।

योजना की सफलता और चुनौती

आयुष्मान योजना के तहत छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया गया है, लेकिन कुछ अस्पतालों का इलाज न करना योजना की सफलता में रुकावट डाल रहा है। मंत्री ने यह भी कहा कि इस योजना के द्वारा राज्य और केंद्र सरकार की साझेदारी से गरीबों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

आगे, स्वास्थ्य मंत्री ने आदेश दिए कि अस्पतालों को नोटिस जारी कर, इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे।

समस्याएं और समाधान

योजना के तहत मरीजों का इलाज नहीं करने की घटनाएं निश्चित तौर पर आयुष्मान योजना के उद्देश्य को चुनौती देती हैं। ऐसे मामलों में समीक्षा और कार्रवाई सुनिश्चित करना सरकार की मुख्य प्राथमिकता है। अस्पतालों के खिलाफ जारी नोटिस और चल रही जांच से यह संकेत मिलता है कि सरकार इस दिशा में कड़ी कार्रवाई करेगी और योजना को बेहतर तरीके से लागू करने के लिए सुधार करेगी

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