दिल्ली में गाड़ियों से होने वाले प्रदूषण की रोकथाम के लिए ई-वाहनों को बढ़ावा देने का प्रयास किया जा रहा है। इस क्रम में पार्किंग में 20 फीसदी जगह ई-गाड़ियो के लिए आरक्षित की जा सकती है।
दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (डीपीसीसी) ने हाल ही में अपनी एक रिपोर्ट में दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) को अपने मास्टर प्लान और दिल्ली नगर निगम को अपने बिल्डिंग प्लान में इसके लिए अलग से प्रावधान करने के लिए कहा है। दिल्ली-एनसीआर को देश के सबसे ज्यादा प्रदूषित हिस्से में शामिल किया जाता है।
यहां साल के ज्यादातर हिस्से में प्रदूषण का स्तर सामान्य से ज्यादा होता है। सालभर होने वाले प्रदूषण में सबसे बड़ी हिस्सेदारी वाहनों के धुएं की मानी जाती है। इसके चलते डीजल-पेट्रोल वाहन के बजाय ई-वाहन को प्रोत्साहित करने की अलग-अलग योजनाओं पर काम चल रहा है।
डीपीसीसी ने डीडीए से कहा है कि उसे अपने मास्टर प्लान में इस तरह का प्रावधान करना चाहिए, जिसके जरिए 20 फीसदी पार्किंग को ई-वाहनों के लिए आरक्षित किया जा सके। दिल्ली नगर निगम को कहा गया है कि वह अपने बिल्डिंग प्लान में 20 फीसदी जगह ई-वाहन पार्किंग और चार्जिंग स्टेशन के लिए आरक्षित कर सकता है। इससे दिल्ली में ई-वाहनों को प्रोत्साहित करने में मदद मिलेगी।
वाहनों से होता है 51 फीसदी प्रदूषण
दिल्ली में अक्टूबर-नवंबर में प्रदूषण में पराली के धुएं की हिस्सेदारी बढ़ जाती है, लेकिन हाल ही में जारी एक विश्लेषण में विज्ञान एवं पर्यावरण केंद्र ने दिल्ली में सालभर होने वाले प्रदूषण में वाहनों के धुएं की हिस्सेदारी 51 फीसदी तक होने की बात कही है। प्रदूषण के किसी भी अन्य कारक की तुलना में यह बहुत ज्यादा है। इसलिए सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के साथ-साथ ई-वाहनों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है।
नई गाड़ियों में 14 प्रतिशत ईवी
डीपीसीसी की रिपोर्ट बताती है कि पहले की तुलना में दिल्ली में ई-वाहनों के प्रति लोगों का रुख बढ़ा है। इस साल 15 सितंबर तक कुल बिकने वाले वाहनों में ई-वाहनों की हिस्सेदारी 14 फीसदी तक रही। दिल्ली में कुल तीन लाख 21 हजार से ज्यादा ई-वाहन पंजीकृत कराए गए हैं।