मेडिकल लापरवाही
यूपी में मेडिकल लापरवाही का सबसे गंभीर मामला
उत्तर प्रदेश में एक महिला मरीज की गलत किडनी निकालने की घटना ने चिकित्सा जगत में हड़कंप मचा दिया।
- महिला शांति देवी की दाहिनी किडनी खराब थी, जबकि बाईं किडनी स्वस्थ थी।
- ऑपरेशन के दौरान स्वस्थ बाईं किडनी निकाल दी गई, जबकि खराब दाहिनी किडनी शरीर में रही।
- इस चूक ने महिला की जिंदगी को खतरे में डाल दिया और लगभग दो साल तक उन्हें डायलिसिस पर रहना पड़ा।
ऑपरेशन और चूक का विवरण
- 6 मई 2012: शांति देवी का ऑपरेशन हुआ।
- डॉक्टरों ने दावा किया कि खराब किडनी निकाल दी गई।
- कुछ हफ्तों बाद, जब महिला की हालत में सुधार नहीं हुआ, तो CT स्कैन और रेडियोलॉजिकल टेस्ट किए गए।
- रिपोर्ट में सामने आया कि दाहिनी किडनी अब भी शरीर में थी, जबकि स्वस्थ बाईं किडनी गायब थी।
- डॉक्टर ने खुद सुनवाई में यह स्वीकार किया कि बाईं किडनी निकाल दी गई थी।
मेडिकल जांच और आयोग का निर्णय
- उत्तर प्रदेश मेडिकल काउंसिल और मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया ने डॉक्टर की लापरवाही मानते हुए कार्रवाई की।
- डॉक्टर का रजिस्ट्रेशन दो साल के लिए सस्पेंड किया गया।
- राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) ने इसे गंभीर मेडिकल लापरवाही माना।
- आयोग ने परिवार को कुल 2 करोड़ रुपये मुआवजे के रूप में देने का आदेश दिया।
मुआवजे का वितरण
- 1.5 करोड़ रुपये: मेडिकल लापरवाही के लिए।
- परिवार के सदस्यों को प्यार, स्नेह और वैवाहिक जीवन के नुकसान के लिए 10-10 लाख रुपये।
- कानूनी खर्च के लिए 1 लाख रुपये।
- भुगतान में देरी होने पर 20 फरवरी 2014 से 6% वार्षिक ब्याज, बाद में 9% तक।
मेडिकल लापरवाही की गंभीरता
- यदि बाईं किडनी सुरक्षित रहती, तो शांति देवी लंबी उम्र तक जीवित रह सकती थीं।
- आयोग ने इसे मेडिकल डिजास्टर और चिकित्सा क्षेत्र की बड़ी विफलता बताया।
- फर्जी केस शीट पेश करने जैसे प्रयास भी जांच में सामने आए।