“मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बस्तर अभियान”
बस्तर में स्वास्थ्य अभियान ने पकड़ी रफ्तार, सुदूर अंचलों में भरोसा बढ़ा
रायपुर, छत्तीसगढ़ – मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बस्तर अभियान के तहत बस्तर संभाग में स्वास्थ्य सेवाओं का एक बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। बस्तर के घने जंगलों, ऊबड़-खाबड़ पहाड़ियों और दूरस्थ बसाहटों में रहने वाले लोगों के लिए यह पहल एक नई उम्मीद लेकर आई है। अब, स्वास्थ्य विभाग की टीमें खुद इन क्षेत्रों तक पहुंच रही हैं, जहां पहले स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच असंभव सी बात थी। इस अभियान के माध्यम से बस्तर के लोग स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ सीधे अपने दरवाजे पर पा रहे हैं।
आंकड़ों में बढ़ती सफलता
मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बस्तर अभियान के तहत अब तक 6.39 लाख से अधिक लोगों की स्वास्थ्य जांच की जा चुकी है। इस अभियान ने न केवल चिकित्सा सेवाओं की पहुंच को बढ़ाया है, बल्कि निःशुल्क उपचार और दवा से हजारों मरीजों को राहत भी दी है। 8055 गंभीर मरीजों को विशेषज्ञ उपचार के लिए भेजा गया है, जिससे उनकी स्थिति में सुधार की उम्मीद बढ़ी है।
टीमों ने किया उपचार का हर कदम
अभियान के दौरान, स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने मलेरिया, टीबी, कुष्ठ, मुख कैंसर, सिकल सेल और मोतियाबिंद जैसी गंभीर बीमारियों की पहचान की।
- 1125 मलेरिया,
- 3245 टीबी,
- 2803 कुष्ठ,
- 1999 मुख कैंसर,
- 1527 सिकल सेल, और
- 2496 मोतियाबिंद के मामलों की पहचान की गई।
इन मामलों के समय पर उपचार से बस्तर में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और उम्मीद भी बढ़ी है। गंभीर बीमारियों की पहचान और उनका उपचार शुरू करने से इन बीमारियों की जटिलताओं को कम करने में मदद मिल रही है, साथ ही भविष्य में गंभीर स्थितियों को टालने का प्रयास किया जा रहा है।
स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में बदलाव
अभियान को प्रभावी बनाने के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर जिला अस्पताल और सुपर स्पेशियलिटी संस्थानों तक एक समन्वित व्यवस्था बनाई गई है। साथ ही, मोबाइल मेडिकल यूनिट्स और स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया गया है, जिससे दूर-दराज के गांवों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंच रही हैं। अब लोग सुदूर अंचलों तक पहुंचने के लिए लंबी दूरी तय करने को मजबूर नहीं हैं।
डिजिटल स्वास्थ्य प्रोफाइल का निर्माण
साथ ही, आभा (डिजिटल स्वास्थ्य प्रोफाइल) तैयार किए जा रहे हैं, ताकि हर व्यक्ति की स्वास्थ्य जानकारी एकत्रित हो सके। इससे भविष्य में इलाज की निरंतरता बनी रहेगी और जरूरत पड़ने पर तुरंत स्वास्थ्य जानकारी उपलब्ध हो सकेगी। यह कदम बस्तर में स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलाइजेशन की दिशा में एक अहम कदम है।