मंदिर में दलितों के प्रवेश पर बवाल, गर्भगृह से निकाल ली गई प्रतिमा; फिर क्या हुआ

मंड्या जिले के प्रसिद्ध कालाभैरवेश्वर मंदिर में दलितों के प्रवेश के विरोध में मूर्ति को भी गर्भगृह से अलग शिफ्ट कर दिया गया। जानकारी के मुताबिक गांव के कुछ लोगों ने मंदिर के उत्सव के दौरान उत्सव प्रतिमा को मंदिर के परिसर में ही अलग रख दिया। मंड्य शहर से 13 किलोमीटर दूर हानाकेरे गांव में यह मंदिर स्थित है। दलितों प्रवेश को लेकर जब विवाद शुरू हुआ तो सरकारी अधिकारी और पुलिस ने ग्रामीणों के साथ बैठक की।इसके बाद तय हुआ कि दलितों को मंदिर में प्रवेश दिया जाएगा।

ग्रामीणों के मुताबिक यह मंदिर सैकड़ों साल पुराना है और हाल ही में इसके रेनोवेशन का काम किया गया है। पूर्व कांग्रेस विधायक एम श्रीनिवास ने इसका रेनोवेशन करवाया। गांव के कुछ लोग इसमें परंपरा के मुताबिक दलितों के प्रवेश का विरोध कर रहे थे। उनका कहना था कि गांव में दलितों के लिए अलग मंदिर बनवाया गया है।

दलितों को मंदिर में प्रवेश की अनुमति दिए जाने पर भड़के ग्रामीणों उत्सव मूर्ति को मंदिर परिसर में दूसरी जगह रख दिया। उनका कहना है कि उन्होंने मंदिर में खर्च किया है। मूर्ति शिफ्ट होने के बाद बवाल शुरू हो गया और इसके बाद मंदिर को बंद करना पड़ा। इसके बाद एक दिन बाद मंदिर के पट खुले और फिर पूजा की गई।

जानकारी के मुताबिक बवाल के बाद और सरकारी अधिकारियों के दखल के बाद सभी जातियों के लोगों को मंदिर में दर्शन की अनुमति दे दी गई। इसके अलावा एहतियातन पुलिस फोर्स को गांव में तैनात किया गया है। तहसीलदार शिवकुमार ने कहा कि अब मामले का हल निकाल लिया गया है और विवाद को लेकर सावधानी बरती जा रही है।

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