भलेसर जल संकट
भीषण गर्मी में भलेसर गांव का पेयजल संकट
महासमुंद जिले के ग्राम पंचायत भलेसर में भीषण गर्मी के बीच पेयजल संकट गहराता जा रहा है। हालात ऐसे हैं कि गांव की महिलाएं पीने का पानी लाने के लिए एक किलोमीटर दूर केशवा नाले तक जाती हैं।
वहां पानी निकालने के लिए रेत हटानी पड़ती है, तभी परिवारों की प्यास बुझ पाती है।
गांव की स्थिति और प्रभावित क्षेत्र
- भलेसर गांव मुख्यालय से लगभग चार किलोमीटर दूर स्थित है।
- यहां की आबादी लगभग तीन हजार और परिवारों की संख्या लगभग 800 है।
- 15 वार्डों वाले इस पंचायत में कई वार्डों में गंभीर पानी की समस्या है।
- गांव में मौजूद सात हैंडपंपों में केवल दो चालू, जबकि सात बोर में से सिर्फ तीन ही काम कर रहे।
- पंचायत के पांच तालाबों में चार पूरी तरह सूख चुके हैं।
जल जीवन मिशन योजना के बावजूद समस्या
- जल जीवन मिशन के तहत करीब 1.80 करोड़ रुपए की लागत से पानी टंकी और घर-घर नल कनेक्शन बनाए गए थे।
- लेकिन पिछले चार वर्षों से टंकी में पानी नहीं आया और नलों से पानी उपलब्ध हुआ।
- वार्ड क्रमांक 1, 2, 8, 9, 10, 11, 12 और 14 के लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हैं।
ग्रामीणों की शिकायतें और प्रशासनिक पहल
- ग्रामीणों और सरपंच का कहना है कि पिछले छह वर्षों से लगातार शिकायत की जा रही है।
- लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं मिल पाया है।
- कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने बताया कि भलेसर सहित अन्य पंचायतों में बोर सूखने की शिकायतें मिली हैं।
- उन्होंने कहा कि औद्योगिक संस्थानों और राइस मिलरों की बैठक करके CSR मद से नए बोर कराने के निर्देश दिए गए हैं।
- साथ ही लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की टीम को मौके पर भेजकर जल्द समाधान के निर्देश दिए गए हैं।
सवाल खड़ा कर रहा है करोड़ों का खर्च
- वर्षों बाद भी ग्रामीणों को पेयजल संकट से राहत नहीं मिली।
- करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद लोगों तक पानी नहीं पहुंचना प्रशासन और परियोजना की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है।
- महिलाओं को रेत हटाकर पानी निकालने पर मजबूर होना गांव में पानी की गंभीर कमी को उजागर करता है।