दुर्ग जनपद में सियासी घमासान: 16वें वित्त की राशि के आवंटन को लेकर हंगामा, विपक्ष ने विधायक और अध्यक्ष के खिलाफ की नारेबाजी

दुर्ग: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जनपद पंचायत की सामान्य सभा की बैठक में उस समय जमकर हंगामा हो गया, जब 16वें वित्त आयोग की राशि के आवंटन को लेकर सत्ता और विपक्ष आमने-सामने आ गए। सत्ता पक्ष ने बहुमत के आधार पर अपने सदस्यों के क्षेत्रों में राशि बांटने का फैसला किया, जिसका विरोध करते हुए विपक्षी सदस्यों ने जमकर नारेबाजी की और मनमानी का आरोप लगाया।

जनसंख्या के आधार पर राशि बांटने की थी मांग

बैठक में विभागीय समीक्षा के बाद जैसे ही 16वें वित्त की राशि पर चर्चा शुरू हुई, जनपद अध्यक्ष कुलेश्वरी देवांगन ने बहुमत के आधार पर राशि आवंटित करने की बात रखी। इस पर आपत्ति जताते हुए उपाध्यक्ष राकेश हिरवानी ने मांग की कि विकास कार्यों के लिए फंड क्षेत्र की जनसंख्या के आधार पर हर सदस्य को मिलना चाहिए।

उपाध्यक्ष का यह भी कहना था कि कुछ दिन पहले ही आपसी विवाद खत्म कर सभी सदस्यों के क्षेत्रों में बराबर राशि देने का संदेश भिजवाया गया था, लेकिन अब अचानक इस पर टालमटोल क्यों की जा रही है।

गुप्त मतदान की मांग और सदन में हंगामा

विपक्षी सदस्यों ने आरोप लगाया कि स्थानीय विधायक के हस्तक्षेप के कारण ऐसा किया जा रहा है। उपाध्यक्ष राकेश हिरवानी ने चुनौती दी कि यदि बहुमत के आधार पर ही निर्णय लेना है, तो गुप्त मतदान कराया जाए, क्योंकि सत्ता पक्ष के कई सदस्य भी इसके पक्ष में हैं।

हालांकि, अध्यक्ष कुलेश्वरी देवांगन ने गुप्त मतदान से इनकार करते हुए हाथ उठवाकर खुला बहुमत साबित करने की बात कही और प्रस्ताव पारित कर बैठक स्थगित करने की घोषणा कर दी।

विधायक और अध्यक्ष के खिलाफ फूटा गुस्सा

गुप्त मतदान न कराए जाने और बहुमत से प्रस्ताव पारित करने पर विपक्षी सदस्य भड़क उठे। राकेश हिरवानी, झमित गायकवाड़, संतोषी देशमुख, ढालेश साहू, कामिनी साहू समेत कई अन्य सदस्यों ने बैठक में जोरदार रोष जताया। आक्रोशित सदस्यों ने दुर्ग ग्रामीण विधायक ललित चंद्राकर और जनपद अध्यक्ष कुलेश्वरी देवांगन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

अध्यक्ष बोलीं- सदस्यों की सहमति से हुआ फैसला

इस पूरे विवाद पर जनपद अध्यक्ष कुलेश्वरी देवांगन का कहना है कि यह निर्णय सभी संबंधित सदस्यों की सहमति और बहुमत के आधार पर लिया गया है। जब हाथ उठाकर पहले ही बहुमत साबित हो चुका था, तो दोबारा मतदान कराने की कोई आवश्यकता नहीं थी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस पूरी प्रक्रिया में विधायक का किसी भी तरह का कोई दबाव नहीं है।

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