धमतरी: छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले से एक बेहद दिलचस्प और अनोखी परंपरा सामने आई है। जहां देश-दुनिया में दीपावली का त्योहार एक तय कैलेंडर के हिसाब से मनाया जाता है, वहीं धमतरी जिला मुख्यालय से करीब 22 किलोमीटर दूर स्थित सेमरा गांव में दिवाली देश से ठीक एक हफ्ते पहले ही धूमधाम से मना ली जाती है। सिर्फ दिवाली ही नहीं, बल्कि यहां दशहरा और होली जैसे बड़े त्योहार भी अपने तय समय से एक सप्ताह पहले मनाने की सदियों पुरानी परंपरा है। आधुनिकता के इस दौर में भी इस गांव के लोगों ने अपनी इस सांस्कृतिक विरासत को पूरी आस्था के साथ संजोकर रखा है।
क्या है एक हफ्ते पहले त्योहार मनाने की मान्यता?
ग्रामीणों के अनुसार, इस अनोखी परंपरा के पीछे एक गहरी पौराणिक मान्यता जुड़ी हुई है:
- देवताओं का आदेश: बहुत पहले गांव के आराध्य देवता ‘सिदार’ ने एक ग्रामीण को सपने में दर्शन देकर यह संदेश दिया था कि गांव में कोई भी त्योहार मनाने से पहले उन्हें हूम-धूप (पूजा-अर्चना) अर्पित करना अनिवार्य है।
- अनहोनी का डर: बुजुर्गों का मानना है कि यदि इस प्राचीन दस्तूर या परंपरा को तोड़ा गया, तो गांव पर कोई बड़ी अनहोनी आ सकती है।
यही वजह है कि इस मान्यता के चलते आज की युवा पीढ़ी भी बिना किसी सवाल के इस परंपरा को पूरी श्रद्धा के साथ आगे बढ़ा रही है।
त्योहार के बहाने सजता है पूरा गांव
समय बदलने के साथ भले ही त्योहारों का स्वरूप आधुनिक हो गया हो, लेकिन सेमरा गांव का उत्साह आज भी वैसा ही है:
- खास मेहमाननवाजी: तय तारीख से पहले त्योहार होने के कारण इस गांव में रिश्तेदारों और मेहमानों के आने का सिलसिला समय से पहले शुरू हो जाता है। इससे पुरानी यादें ताजा होती हैं और आपसी मेल-जोल बढ़ता है।
- पारंपरिक रौनक: सुबह से ही गांव की महिलाएं घरों की साफ-सफाई, सुंदर रंगोली और पारंपरिक पकवान बनाने में जुट जाती हैं। शाम ढलते ही पूरा गांव दीपों की रोशनी से जगमगा उठता है।
धमतरी का सेमरा गांव आज अपनी इस अनूठी परंपरा के चलते देश भर में एक अलग पहचान बना चुका है, जहां आस्था और संस्कृति का यह अनूठा संगम पीढ़ियों से बदस्तूर जारी है।