बालोद: छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के आदिवासी विकासखंड डौंडी के अंतर्गत आने वाले आड़ेझर गांव के ग्रामीणों ने पीने के पानी की भीषण समस्या को लेकर अनोखा और कड़ा विरोध प्रदर्शन किया। पानी की मांग को लेकर ग्रामीण अपने गांव से करीब 2 किलोमीटर दूर जंगल में दल्लीराजहरा-महामाया मार्ग पर धरने पर बैठ गए और चक्काजाम कर दिया। तीन दिनों तक चले इस आंदोलन के बाद प्रशासन के लिखित आश्वासन पर आखिरकार चक्काजाम समाप्त हुआ।
बोइरडीही जलाशय से पानी देने की थी मुख्य मांग
ग्रामीणों का कहना था कि उनके गांव का मौजूदा पानी पीने योग्य बिल्कुल नहीं है और इलाके में बोरवेल भी सफल (सक्सेस) नहीं हो पा रहे हैं। इसी गंभीर समस्या से त्रस्त होकर ग्रामीण दिन-रात सड़क पर डटे रहे। उनकी प्रमुख मांग थी कि उन्हें बोइरडीही जलाशय से पीने के पानी की सप्लाई दी जाए।
इस तीन दिवसीय आंदोलन के दौरान जिला पंचायत सदस्य नीलिमा श्याम और जनपद सदस्य (डौंडी) तुलेश्वर हिचमी ने भी मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों को अपना पूरा समर्थन दिया।
BSP को हुआ लाखों का नुकसान
लगातार तीन दिनों तक चले इस चक्काजाम के कारण महामाया माइंस, दुलकी माइंस और कलवर माइंस से कच्चा लोहा (लौह अयस्क) लेकर आने-जाने वाले भारी वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप रही। सड़कों पर सैकड़ों गाड़ियां फंसी रहीं, जिसके चलते भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) को लाखों रुपये के राजस्व का भारी नुकसान उठाना पड़ा।
प्रशासन के लिखित आश्वासन के बाद खत्म हुआ आंदोलन
मामले की गंभीरता को देखते हुए पिछले तीन दिनों से चल रही प्रशासनिक और बीएसपी अधिकारियों की वार्ता विफल होने के बाद, आज डौंडी एसडीएम सुरेश साहू मौके पर पहुंचे।
एसडीएम ने ग्रामीणों से चर्चा की और उन्हें लिखित में आश्वासन दिया कि कल तक उनके गांव में नया बोर खनन करवाया जाएगा। यदि उस बोरवेल से भी पानी नहीं निकलता है, तो वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में उन्हें बोइरडीही जलाशय से पीने का पानी उपलब्ध कराया जाएगा। इस ठोस और लिखित आश्वासन के बाद ग्रामीण संतुष्ट हुए और चक्काजाम समाप्त किया।
सुरक्षा के रहे कड़े इंतजाम
ग्रामीणों के पिछले तीन दिनों से लगातार चल रहे उग्र प्रदर्शन को देखते हुए किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए आज देर शाम बड़ी संख्या में पुलिस बल को मौके पर तैनात किया गया था।