मंदिर हसौद: नगर पालिका परिषद मंदिर हसौद क्षेत्र के अंतर्गत संचालित होने वाले एक ‘फैमिली ढाबे’ में नियमों को ताक पर रखकर अवैध रूप से शराब बेचने और परोसने का मामला सामने आया है। इस गंभीर लापरवाही और अवैध गतिविधियों की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने कड़ा रुख अपनाते हुए औचक निरीक्षण किया और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
अचानक दबिश में हुआ बड़ा खुलासा
बीते 27 सितंबर को नगर पालिका अध्यक्ष गोपाल चतुर्वेदी के नेतृत्व में पार्षदों की एक टीम ने संबंधित ढाबे पर अचानक छापा मारा। इस दौरान ढाबे के भीतर का नज़ारा देखकर जनप्रतिनिधि भी हैरान रह गए। निरीक्षण के दौरान मौके पर शराब की खाली व भरी बोतलें, गिलास और खुलेआम जाम छलकाते हुए लोग पाए गए।
जांच के दौरान एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि ढाबे पर काम करने वाली एक महिला कर्मचारी द्वारा ग्राहकों को शराब परोसी जा रही थी। इस बात ने स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था पर कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर किसकी शह पर फैमिली ढाबे की आड़ में इस तरह का अवैध कारोबार फल-फूल रहा है।
प्रशासन से सख्त एक्शन की मांग
घटना की गंभीरता को देखते हुए नगर पालिका अध्यक्ष और पार्षदों ने आबकारी विभाग (Excise Department) और खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग को पत्र लिखकर उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है। जनप्रतिनिधियों ने प्रशासन के सामने निम्नलिखित मुख्य मांगें रखी हैं:
- लाइसेंस की जांच: ढाबे के पास शराब बेचने या परोसने से संबंधित किसी प्रकार का वैध लाइसेंस है या नहीं, इसकी गहन पड़ताल हो।
- दस्तावेजों का सत्यापन: ढाबे के खाद्य लाइसेंस और अन्य व्यावसायिक प्रशासनिक अनुमतियों की जांच की जाए।
- ढाबा सील करने की कार्रवाई: नियमों और लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन साबित होने पर तुरंत प्रभाव से ढाबे को सील किया जाए और दोषियों पर कानूनी शिकंजा कसा जाए।
प्रशासन को उग्र आंदोलन की चेतावनी
जनप्रतिनिधियों का कहना है कि एक ‘फैमिली ढाबे’ की आड़ में इस तरह का गैर-कानूनी कार्य न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह क्षेत्र के सामाजिक और पारिवारिक माहौल को भी दूषित कर रहा है। ऐसे प्रतिष्ठानों का संचालन तय कानूनी दायरे में ही होना चाहिए।
स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि आबकारी विभाग, खाद्य विभाग और स्थानीय प्रशासन ने इस मामले में जल्द से जल्द कोई ठोस और निष्पक्ष कदम नहीं उठाया, तो वे नगरवासियों को साथ लेकर सड़कों पर उतरेंगे और उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।