नई दिल्ली: देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) में एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। यहां पिछले 14 वर्षों से सर्जरी का इंतजार कर रही 15 वर्षीय तन्वी की मौत हो गई है। इस दर्दनाक घटना के बाद मृतका के पिता मुकेश परियानी ने डॉक्टरों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कानूनी रास्ता अपनाने का फैसला किया है। पिता ने एम्स के डॉक्टर सचिन तलवार और अन्य संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज कराने की पूरी तैयारी कर ली है।
8 सितंबर को दिल्ली लौटकर दर्ज कराएंगे शिकायत
दुखद हादसे के बाद मृतका के पिता मुकेश परियानी ने स्पष्ट किया है कि वे मंगलवार, 8 सितंबर को दिल्ली वापस लौटेंगे और पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराएंगे। इसके साथ ही न्याय की गुहार लगाने के लिए वे राष्ट्रपति भवन, प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से भी मुलाकात करेंगे। उनका कहना है कि जब तक इस मामले में सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं होती, उन्हें न्याय नहीं मिलेगा।
1 सितंबर को एम्स में हुई थी मौत, 2012 से चल रहा था रिकॉर्ड
तन्वी की मौत बीते 1 सितंबर को एम्स के भीतर ही हुई थी। शुरुआती मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार, उसकी मौत का कारण ‘हाइपोक्सिक स्पेल’ और ‘कार्डियक अरेस्ट’ बताया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पोस्टमार्टम पूरा कर लिया गया है, जिसकी रिपोर्ट एम्स की उच्चस्तरीय जांच समिति को सौंपी जाएगी।
एम्स की यह विशेष समिति साल 2012 से लेकर 2026 तक के सभी मेडिकल दस्तावेजों की गहन समीक्षा कर रही है। इसमें ओपीडी के पर्चे, जांच रिपोर्ट, इलाज के दौरान बरती गई प्रक्रिया और सर्जरी में हुई कथित देरी जैसे सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
पिता का गंभीर आरोप- ‘2014 में ही जमा करा दिए थे पैसे और खून’
पीड़ित पिता मुकेश परियानी ने सिस्टम और डॉक्टरों पर सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि साल 2014 में ही सर्जरी के लिए अस्पताल में पैसे और रक्त (Blood) जमा करा दिए गए थे, लेकिन इसके बावजूद डॉक्टरों ने ऑपरेशन नहीं किया और लगातार तारीखें बदलते रहे।
पिता का यह भी आरोप है कि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में शिकायत किए जाने के बाद भी डॉक्टर सचिन तलवार ने सर्जरी करने से साफ इनकार कर दिया था। पिता का सवाल है, “जब तक दोषी डॉक्टरों पर सख्त एक्शन नहीं लिया जाएगा, तब तक इस तरह की जांच समितियों का क्या फायदा?”
फिलहाल इस पूरे मामले में पुलिस कार्रवाई और एम्स की उच्चस्तरीय जांच कमेटी की रिपोर्ट पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं, ताकि यह साफ हो सके कि आखिर एक मासूम को 14 साल तक इलाज के लिए क्यों तरसना पड़ा।