कोरबा/हरदीबाजार: एसईसीएल (SECL) दीपका खदान के विस्तार के विरोध में हरदीबाजार क्षेत्र के ग्रामीणों का गुस्सा आखिरकार फूट पड़ा है। प्रशासन और प्रबंधन द्वारा बिना पर्याप्त सूचना के शासकीय भवनों को तोड़े जाने के विरोध में शनिवार को सैकड़ों ग्रामीणों ने दीपका महाप्रबंधक (जीएम) कार्यालय का घेराव कर मुख्य गेट पर ताला जड़ दिया। इस दौरान सीआईएसएफ जवानों के साथ ग्रामीणों की तीखी नोकझोंक भी हुई। लगभग 8 घंटे चले इस उग्र प्रदर्शन के बाद बिलासपुर मुख्यालय में मांगों पर चर्चा के आश्वासन पर शाम को आंदोलन समाप्त हुआ।
सुबह-सुबह हुई कार्रवाई से बढ़ा आक्रोश
सूत्रों के अनुसार, शुक्रवार की सुबह करीब 5 बजे एसईसीएल प्रबंधन ने भारी सुरक्षा बल और एक्सीवेटर की मदद से हरदीबाजार में स्वास्थ्य केंद्र, पटवारी कार्यालय और आंगनबाड़ी सहित कुल 8 शासकीय भवनों को जमींदोज कर दिया था।
अस्पताल के कर्मचारियों का कहना है कि इस एकतरफा कार्रवाई के दौरान उन्हें अस्पताल का सामान और जरूरी दवाइयां बाहर निकालने का भी मौका नहीं मिला, जिससे महत्वपूर्ण दस्तावेज और दवाइयां मलबे में दब गईं। शनिवार को जब आसपास के कई गांवों से मरीज इलाज के लिए पहुंचे, तो अस्पताल टूटा देखकर उन्हें निराश लौटना पड़ा। इस कार्रवाई से नाराज हरदीबाजार के व्यापारियों ने साप्ताहिक बाजार के दिन भी अपनी दुकानें पूरी तरह बंद रखकर विरोध जताया।
विधायक प्रेमचंद पटेल और सरपंच के नेतृत्व में प्रदर्शन
शनिवार सुबह 9 बजे कटघोरा विधायक प्रेमचंद पटेल और सरपंच लोकेश्वर कंवर के नेतृत्व में हरदीबाजार के अलावा सराईसिंगार, रैंकी, मलगांव, आमगांव, दर्शखांचा और सुआभोड़ी गांव के सैकड़ों ग्रामीण दीपका पहुंचे।
प्रदर्शन के दौरान जीएम ऑफिस के बाहर तैनात सीआईएसएफ और पुलिस बल के साथ ग्रामीणों की धक्का-मुक्की भी हुई, लेकिन300 से अधिक महिला और पुरुष मुख्य गेट के सामने धरने पर बैठ गए। इस तालाबंदी के कारण एसईसीएल एरिया ऑफिस का कामकाज पूरी तरह ठप रहा और अधिकारी-कर्मचारी बाहर ही फंसे रहे। दीपका के सीजीएम अशोक कुमार ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े रहे।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें
आंदोलनकारी ग्रामीणों और विस्थापितों की मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:
- उचित मुआवजा: जमीन अधिग्रहण में मुआवजा निर्धारण और पत्रक की गड़बड़ी को दूर किया जाए।
- पुनर्वास और बसाहट: विस्थापित परिवारों के लिए जल्द से जल्द बेहतर पुनर्वास और नई बसाहट की व्यवस्था की जाए।
- स्थायी रोजगार: भूमि अधिग्रहण के बदले प्रभावित परिवारों के पात्र सदस्यों को नियमानुसार स्थायी नौकरी दी जाए।
- अधिकारों की रक्षा: लगभग 18 हेक्टेयर जमीन से प्रभावित होने वाले परिवारों के वैध अधिकारों की पूरी रक्षा की जाए।
विधायक की चेतावनी: खदान का काम भी होगा बंद
कटघोरा विधायक प्रेमचंद पटेल ने प्रशासन की इस कार्रवाई को गलत ठहराते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की कार्रवाई से पहले ग्राम पंचायत और स्थानीय जनता को पूर्व सूचना दी जानी चाहिए थी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रबंधन ने जल्द ही ग्रामीणों की जायज मांगें पूरी नहीं कीं, तो आने वाले समय में खदान का कामकाज भी पूरी तरह ठप करा दिया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी दीपका प्रबंधन की होगी।
अंततः प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा बिलासपुर मुख्यालय में मांगों पर उच्चस्तरीय चर्चा का आश्वासन दिए जाने के बाद शाम 5 बजे यह धरना-प्रदर्शन समाप्त हुआ।