कवर्धा: छत्तीसगढ़ के कबीरधाम (कवर्धा) जिले में जंगली जानवरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। हाल ही में हुई दो अलग-अलग घटनाओं ने ग्रामीण इलाकों में हड़कंप मचा दिया है। एक तरफ जहां सियार ने बाइक सवार पर हमला कर उसे लहूलुहान कर दिया, वहीं दूसरी तरफ जंगल में लकड़ी काटने गए एक ग्रामीण पर तेंदुए ने अचानक धावा बोल दिया। इन दोनों घटनाओं के बाद से स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल है।
छपरी गांव में सियार का हमला, ग्रामीणों ने पकड़ा
ताजा मामला कवर्धा जिले के छपरी गांव का है। रविवार देर शाम एक ग्रामीण अपनी बाइक से जा रहा था, तभी रास्ते में अचानक एक आक्रामक सियार ने उस पर हमला कर दिया।
- गंभीर चोटें: इस अचानक हुए हमले में बाइक सवार ग्रामीण के हाथों में गहरे जख्म आए हैं, जिससे वह बुरी तरह लहूलुहान हो गया।
- ग्रामीणों की मुस्तैदी: घटना के बाद आक्रोशित और सतर्क ग्रामीणों ने तुरंत सूझबूझ दिखाते हुए हमलावर सियार को घेरकर पकड़ लिया और उसे एक जाली के अंदर बंद कर दिया।
लोहारा वन परिक्षेत्र में तेंदुए का खौफ
सियार के आतंक के अलावा जिले के लोहारा वन परिक्षेत्र से तेंदुए के हमले की सनसनीखेज खबर सामने आई है।
- लकड़ी काटने गए ग्रामीण पर हमला: शनिवार शाम कुटकीपारा गांव के पास जंगल में कुछ ग्रामीण लकड़ी काटने गए थे। इसी दौरान घात लगाए बैठे तेंदुए ने एक ग्रामीण पर अचानक हमला बोल दिया।
- हालत खतरे से बाहर: इस खौफनाक हमले में ग्रामीण के हाथ और कंधे पर गंभीर चोटें आईं हैं। आसपास मौजूद अन्य लोगों के शोर मचाने पर तेंदुआ वहां से भागा। घायल ग्रामीण को तुरंत लोहारा उपस्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की देखरेख में उसका इलाज जारी है। राहत की बात यह है कि उसकी स्थिति अब सामान्य बताई जा रही है।
अब भी वन विभाग की पकड़ से बाहर है तेंदुआ
जिले के विभिन्न ग्रामीण इलाकों में लगातार तेंदुए की मौजूदगी दर्ज की जा रही है, जिससे लोगों का घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। वन विभाग की टीम तेंदुए को पकड़ने के लिए लगातार कॉम्बिंग और सर्च ऑपरेशन चला रही है।
तेंदुए को पिंजरे में कैद करने के लिए विभाग ने विशेष तैयारी की है:
- मौके पर लोहे के पिंजरे और जाल लगाए गए हैं।
- तेंदुए को लुभाने के लिए पिंजरे के पास चारे के तौर पर बकरी को रखा गया है।
- हालांकि, तमाम कोशिशों के बावजूद शातिर तेंदुआ अभी तक वन विभाग की पकड़ से कोसों दूर है।
ग्रामीणों की बढ़ी चिंता, सुरक्षा पर उठे सवाल
लगातार सामने आ रही इन वन्यजीव हमलों की वारदातों ने ग्रामीणों की रातों की नींद उड़ा दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शाम ढलते ही जंगल के रास्तों पर चलना जोखिम भरा हो गया है। ऐसे में वन विभाग के सामने ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ इन वन्यजीवों का सुरक्षित रेस्क्यू करना एक बड़ी और अहम चुनौती बन गया है।