गरियाबंद / छत्तीसगढ़: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में भ्रष्टाचार और विकास के दावों की पोल खोलता एक अनोखा मामला सामने आया है। मैनपुर ब्लॉक के ग्रामीण जर्जर सड़क से तंग आकर सड़कों पर उतर आए। ग्रामीणों ने सड़क के बड़े-बड़े गड्ढों में धान की रोपाई करने के साथ-साथ ‘बेशरम के पौधे’ रोपकर शासन-प्रशासन के खिलाफ अनोखा और तीखा विरोध प्रदर्शन किया।
3 साल में बनी, सालभर में उखड़ी सड़क मिली खबर के अनुसार, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत बनी इस सड़क पर गौरघाट, देहारगुड़ा, गिरहोला, आमागुड़ा, सिंहार और रामपारा समेत कई गांवों के हजारों लोग निर्भर हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि 2018 में शुरू हुई यह सड़क 3 साल में बनकर तैयार हुई थी, लेकिन निर्माण के पहले साल में ही यह पूरी तरह उखड़ गई और इसमें जानलेवा गड्ढे हो गए।
अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप ग्रामीणों का कहना है कि जब उन्होंने इसकी शिकायत की, तो पहले अधिकारियों ने मरम्मत का आश्वासन दिया, लेकिन अब 5 साल की गारंटी का समय निकलने का बहाना बनाकर पल्ला झाड़ रहे हैं। इस जर्जर मार्ग पर एक दर्जन से अधिक स्कूल हैं, जहां रोजाना हजारों बच्चे जान जोखिम डालकर आने-जाने को मजबूर हैं।
चेतावनी देते हुए ग्रामीणों ने कहा है कि अगर जल्द ही सड़क की सुध नहीं ली गई, तो वे उग्र आंदोलन और चक्का जाम करने के लिए बाध्य होंगे।