अंबिकापुर: सरगुजा जिले के शिवपुर स्थित एकलव्य आवासीय विद्यालय की व्यवस्थाओं से तंग आकर छात्राओं ने एक बड़ा कदम उठाया है। बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर सोमवार को 45 छात्राएं स्कूल से सीधे अंबिकापुर कलेक्ट्रेट के लिए पैदल ही निकल पड़ीं। जब प्रशासन को इसकी जानकारी मिली तो अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए। आनन-फानन में बस भेजकर छात्राओं को कलेक्ट्रेट लाया गया, जहां इस दौरान एक छात्रा बेहोश भी हो गई।

1. तीन महीने से हॉस्टल में नहीं है बिजली, मेस और पढ़ाई का भी बुरा हाल
कलेक्ट्रेट पहुंची छात्राओं ने जिला प्रशासन को अपनी समस्याओं की लंबी फेरिस्त बताई। छात्राओं का मुख्य आरोप है कि उनके हॉस्टल में पिछले तीन महीनों से बिजली नहीं है, जिससे उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा हॉस्टल के मेस में साफ-सफाई की स्थिति बेहद खराब है। पढ़ाई के मामले में भी लापरवाही बरती जा रही है, फिजिक्स और केमिस्ट्री की कक्षाएं नियमित रूप से नहीं लग रही हैं। छात्राओं का कहना है कि उन्होंने स्कूल प्रबंधन और प्राचार्य से कई बार गुहार लगाई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
2. 30 किलोमीटर का सफर और कलेक्ट्रेट में हंगामा
छात्राएं स्कूल से पैदल ही कलेक्ट्रेट के लिए निकल पड़ीं। करीब 6 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। रास्ते में आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त ललित शुक्ला और कुछ शिक्षकों ने छात्राओं को रोकने और समझाने की बहुत कोशिश की, लेकिन छात्राएं सीधे कलेक्टर से मिलने की जिद पर अड़ी रहीं।
कलेक्ट्रेट पहुंचने के बाद तनाव और लंबी थकान के कारण एक छात्रा अचानक बेहोश होकर गिर गई, जिसे तुरंत एंबुलेंस से मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेजा गया। हालांकि, शिक्षकों ने छात्राओं के किसी के बहकावे में होने की बात कही, लेकिन छात्राओं ने साफ कर दिया कि वे किसी के दबाव में नहीं, बल्कि अपनी समस्याओं से परेशान होकर खुद आई हैं।
3. कलेक्टर के सख्त निर्देश: तत्काल सुधारी जाएं व्यवस्थाएं
मामले की गंभीरता को देखते हुए सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत ने छात्राओं से मुलाकात की और उनकी समस्याएं सुनीं। कलेक्टर ने अधिकारियों को तुरंत सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं:
- हॉस्टल की बिजली व्यवस्था को तत्काल दुरुस्त करने के आदेश।
- शिक्षकों की कमी पूरी करने के लिए जल्द अतिथि शिक्षकों (Guest Teachers) की नियुक्ति।
- मेस की साफ-सफाई की व्यवस्था को तुरंत सुधारने के निर्देश।
कलेक्टर से आश्वासन मिलने के बाद प्रशासन द्वारा भेजी गई बसों से छात्राओं को वापस हॉस्टल भेज दिया गया।