बंगाल में ढहा ममता का किला, तमिलनाडु में स्टालिन का पत्ता साफ; विपक्ष के लिए अब आगे की राह क्या?

देश के चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे लगभग सामने आ चुके हैं। असम और बंगाल में भारतीय जनता पार्टी को प्रचंड बहुमत मिला है। वहीं, तमिलनाडु में फिल्म एक्टर विजय की नेतृत्व वाली तमिलगा वेट्र कझगम (TVK) सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। केरल में दो दशकों के बाद कांग्रेस की वापसी हुई है, जबकि पुडुचेरी में बीजेपी गठबंधन ने 18 सीटों पर जीत हासिल कर सरकार बनाने में सफल रही है।

इन सभी चुनावी राज्यों में से पश्चिम बंगाल भारतीय जनता पार्टी के लिए काफी अहम है। लंबे समय से बंगाल के अंदर सियासी जमीन तलाश रही बीजेपी के लिए यह नतीजा किसी रेगिस्तान में कुआं मिलने से कम नहीं है। लेफ्ट के वर्चस्व को खत्म कर बंगाल की सियासत में आई टीएमसी के 15 साल का कार्यकाल आज चुनावी हार के साथ खत्म हो रहा है।

असम में बंपर जीत के साथ मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा लगातार तीसरी बार राज्य में सरकार बनाने में सफल रहें। यहां भारतीय जनता पार्टी 82 सीटों पर जीतने में सफल रही। जबकि कांग्रेस केवल 19 विधानसभा सीटों पर ही जीत सकी। अलग-अलग एजेंसियों द्वारा जारी किए गए एग्जिट पोल्स के आंकड़ों में भी बीजेपी की बंपर जीत का अनुमान लगाया गया था।

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के नतीजों ने सभी को चौंका कर रख दिया। जहां फिल्मी स्टार थलापति विजय की टीवीके 107 सीटों पर जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। 60 सीटों पर जीत के साथ मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की सत्ताधारी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) दूसरे नंबर पर रही, जबकि ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) 47 सीटों पर जीतकर तीसरे नंबर की पार्टी बनीं। गौरतलब ही कि स्टालिन की डीएमके पिछले एक दशक से तमिलनाडु की सत्ता में काबिज में थी। टीवीके के सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने से दो मुख्य द्रविड़ पार्टियों डीएमके और एआईएडीएमके के बीच चली आ रही पारंपरिक द्वंद्व की स्थिति खत्म हो जाएगी।

सितंबर 2025 में एक रैली के दौरान मची भगदड़ से जुड़े पिछले विवाद के बावजूद विजय की पार्टी ने अपने पहले ही चुनाव में यह शानदार प्रदर्शन किया है। इस नतीजे ने उन्हें राज्य की राजनीति में एक नई ताकत के तौर पर स्थापित कर दिया है। मुमकिन है कि वे उन पहले के अभिनेता-राजनेताओं की कतार में शामिल हो जाएं, जिन्होंने राजनीति में आकर शासन-प्रशासन में सफलतापूर्वक अपनी जगह बनाई थी।

केरल विधासभा चुनाव के नतीजों में कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए बुहमत का जुदाई आंकड़ा छूने में सफल रही। यहां यूडीफी को कुल 99 सीटें मिली है, जिसमें कांग्रेस ने 63 विधासभा सीटों पर जीत हासिल की है। इसी जीत के साथ केरल से मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाली लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) सरकार की सत्ता से विदाई हो जाएगी।

केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रमुख सन्नी जोसेफ ने इन नतीजों को यूडीएफ के पक्ष में स्पष्ट बदलाव का संकेत बताया और विश्वास जताया कि यह गठबंधन 140 सदस्यीय विधानसभा में 100 सीटों का आंकड़ा पार कर लेगा। इस नतीजे से कांग्रेस पार्टी को दक्षिण में एक राज्य सरकार मिल जाएगी, जहां हाल के चुनावों में उसकी मौजूदगी कम हो गई है।

पुडुचेरी 30 सदस्यों वाली विधानसभा है। जहां भारतीय जनता पार्टी के गठबंधन ने कुल 18 सीटों सीटों पर जीत दर्ज की। वहीं, कांग्रेस गठबंधन को केवल छह सीटों पर संतोष करना पड़ा। यहां भी बीजेपी समर्थित सरकार दोबारा बनने जा रही है।

राज्यों के मौजूदा चुनावों का यह दौर हाल के चुनावों में बीजेपी की सफलताओं के क्रम को ही आगे बढ़ाता है। पार्टी की जीत का यह सिलसिला 2014 के आम चुनावों से शुरू हुआ था। फरवरी 2025 में बीजेपी ने दिल्ली में आम आदमी पार्टी (AAP) को हराकर अरविंद केजरीवाल को सत्ता से हटा दिया। नवंबर 2025 में जनता दल (यूनाइटेड) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने बिहार में जबरदस्त जीत हासिल की और नीतीश कुमार एक बार फिर मुख्यमंत्री बने। हालांकि, अप्रैल 2026 में नीतीश कुमार ने इस पद से इस्तीफा दे दिया, जिससे भाजपा-विरोधी प्रमुख मुख्यमंत्रियों की संख्या कम हो गई।

2026 के चुनावों ने कई स्थापित विपक्षी नेताओं की स्थिति को सवालों के घेरे में ला दिया है। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी, तमिलनाडु में एम.के. स्टालिन और केरल मेंपिनाराई विजयन इन सभी नेताओं के हाथ से सत्ता की बागड़ोर छिन गई है। कई वरिष्ठ नेताओं के अब राज्य सरकारों का नेतृत्व न करने से विपक्ष का स्वरूप बदलने की संभावना है। कांग्रेस के लिए केरल में सरकार बनाने के अवसर एक तरह की मजबूती प्रदान करती है। पार्टी नेता इसे दो कारणों से महत्वपूर्ण मानते हैं।

एक तो राज्य प्रशासन पर नियंत्रण पाने के लिए और दूसरा विपक्ष के ढांचे के भीतर राहुल गांधी की स्थिति को मजबूत करने के लिए। खासकर तब, जब अन्य संभावित दावेदार मुख्यमंत्री के पदों से हट रहे हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *