बालोद: छत्तीसगढ़ के बालोद जिले से वन्यजीव प्रेमियों को झकझोर देने वाली बेहद दुखद खबर सामने आई है। जिले में एक ही दिन के भीतर दो अलग-अलग घटनाओं में दो चीतलों की मौत हो गई। पहली घटना में आवारा कुत्तों के खूनी हमले से एक गर्भवती मादा चीतल की जान चली गई, तो वहीं दूसरी घटना में एक जलाशय से नर चीतल का शव बरामद किया गया। वन विभाग की टीम ने दोनों मामलों में आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए पोस्टमार्टम के बाद उनका अंतिम संस्कार कर दिया है।
पहली घटना: कुत्तों के हमले से गर्भवती मादा चीतल की मौत
बालोद जिले के दल्लीराजहरा नगर क्षेत्र में रविवार सुबह दर्दनाक हादसा हुआ।
- कुत्तों ने किया हमला: बीएसपी हॉस्पिटल के पास लगभग 2 वर्ष की एक गर्भवती मादा चीतल अचानक आवारा कुत्तों के चंगुल में फंस गई। कुत्तों के बेरहमी से किए गए हमले में चीतल गंभीर रूप से घायल हो गई थी।
- इलाज से पहले ही तोड़ा दम: स्थानीय लोगों की सूचना पर दल्लीराजहरा वन विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और घायल चीतल को तुरंत अस्पताल ले जाने की कोशिश की, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसने दम तोड़ दिया।
- अंतिम संस्कार: घटना के बाद वन विभाग ने पशु डॉक्टरों से मृत गर्भवती चीतल का पोस्टमार्टम कराया और पूरी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उसका अंतिम संस्कार कर दिया।
दूसरी घटना: गोंदीली जलाशय में तैरती मिली नर चीतल की लाश
दिन ढलते-ढलते बालोद से एक और बुरी खबर सामने आ गई। यह मामला डौंडीलोहारा वन परिक्षेत्र का है।
- मछुवारों ने दी सूचना: रविवार शाम को गैंजी गांव के पास स्थित गोंदीली जलाशय में पानी के बीच एक नर चीतल की लाश तैरती हुई दिखाई दी। वहां मौजूद मछुवारों ने तुरंत इसकी सूचना वन विभाग के अधिकारियों को दी।
- पोस्टमार्टम के बाद अंतिम संस्कार: सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और पानी से चीतल के शव को बाहर निकाला। सोमवार सुबह पशु चिकित्सकों की टीम द्वारा नर चीतल का पोस्टमार्टम कराया गया, जिसके बाद विभाग की देखरेख में उसका अंतिम संस्कार संपन्न हुआ।
वन्यजीवों की सुरक्षा पर उठ रहे सवाल
एक ही दिन में दो-दो चीतलों की इस तरह से हुई अकाल मौतों ने स्थानीय लोगों और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। रिहायशी इलाकों के करीब आ रहे वन्यजीवों को आवारा कुत्तों और अन्य खतरों से सुरक्षित रखना अब वन विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।