बिलासपुर में रेत के अवैध परिवहन पर कोर्ट का कड़ा फैसला: आरोपी को 3 साल की सजा और ₹26,000 का जुर्माना

बिलासपुर जिले में अवैध रेत परिवहन के खिलाफ प्रशासन की सख्त कार्रवाई का असर दिखने लगा है। हाल ही में एक विशेष न्यायालय ने अवैध रूप से रेत ले जा रहे आरोपी को 3 साल के कठोर कारावास और कुल 26,000 रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। यह फैसला खनिज संपदा की चोरी और अवैध उत्खनन पर लगाम लगाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

क्या है पूरा मामला?

कलेक्टर संजय अग्रवाल के निर्देश पर जिले में खनिजों के अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण पर रोक लगाने के लिए एक विशेष अभियान चलाया जा रहा था। इसी अभियान के तहत 17 जून 2025 को ग्राम नगोई घाट स्थित अरपा नदी से एक ट्रैक्टर-ट्रॉली (क्रमांक CG 10 BE 7869) में अवैध रूप से रेत ले जाते हुए आरोपी को पकड़ा गया था।

आरोपी की पहचान कुंवर सिंह कंवर (निवासी – सल्का, थाना कोटा) के रूप में हुई है। प्रशासन की टीम द्वारा जब्ती की कार्रवाई करने के बाद वाहन को पुलिस चौकी बेलगहना की अभिरक्षा में रखा गया था और मामला अदालत में पेश किया गया था।

अदालत का फैसला

खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम के तहत गठित विशेष न्यायालय ने इस मामले की सुनवाई पूरी करते हुए 28 अक्टूबर 2026 को अपना फैसला सुनाया। अदालत ने आरोपी को दोषी पाते हुए निम्नलिखित सजा सुनाई:

  • भारतीय न्याय संहिता (BNS): धारा 303(2) सहपठित धारा 3(5) के तहत 3 वर्ष का कठोर कारावास और ₹1,000 का अर्थदंड।
  • खनिज अधिनियम: खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 के प्रावधानों के तहत ₹25,000 का अतिरिक्त अर्थदंड।

इस प्रकार आरोपी को कुल 26,000 रुपये का जुर्माना भरना होगा और सजा काटनी होगी।

प्रशासन का सख्त अभियान जारी

कलेक्टर संजय अग्रवाल द्वारा 15 जून 2025 को दिए गए निर्देशों के बाद खनिज, राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त टीमों ने ताबड़तोड़ कार्रवाई की थी। इस विशेष अभियान के दौरान कोटा, रतनपुर, सीपत, सिविल लाइन, सरकंडा, मस्तूरी, पचपेड़ी, चकरभाठा और हिर्री थाना क्षेत्रों में कुल 66 एफआईआर दर्ज की गई थीं।

न्यायालय का यह पहला बड़ा फैसला उन लोगों के लिए एक कड़ा संदेश है जो प्रशासनिक नियमों को ताक पर रखकर अवैध रेत उत्खनन और परिवहन के धंधे में संलिप्त हैं। इस प्रकार की कड़ी कानूनी कार्रवाई से खनिज माफियाओं में हड़कंप मच गया है।

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