रायपुर:
छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से सटे ग्रामीण इलाकों में पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाई ने आबकारी विभाग (Excise Department) की कार्यशैली पर बहुत बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल ही में पुलिस की अलग-अलग कार्रवाइयों से यह साफ हो गया है कि महकमे का भ्रष्ट तंत्र किस हद तक फैल चुका है। हैरान करने वाली बात यह है कि जिन कर्मचारियों पर अवैध शराब बिक्री रोकने की जिम्मेदारी है, वही खुद तस्करी के इस अवैध कारोबार में लिप्त पाए गए हैं।
मंदिर हसौद में तीन तस्कर गिरफ्तार, भारी मात्रा में शराब जब्त
ताजा मामले में मंदिर हसौद थाना पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 3 शराब तस्करों को रंगे हाथ दबोचा है। पुलिस ने इनके पास से 100 पौवा देशी शराब और नगद रुपये बरामद किए हैं। इसके साथ ही पुलिस ने अन्य मामलों में कार्रवाई करते हुए आबकारी और प्रतिबंधात्मक धाराओं के तहत 6 और लोगों पर भी शिकंजा कसा है।
पिछले 45 दिनों के आंकड़े डराने वाले: आबकारी बेखबर, पुलिस लगातार कर रही खुलासे
रायपुर ग्रामीण क्षेत्र के महज तीन थानों द्वारा पिछले डेढ़ महीने (45 दिनों) के भीतर जुटाए गए आंकड़े यह बताने के लिए काफी हैं कि इलाके में अवैध शराब का नेटवर्क कितनी गहरी जड़ें जमा चुका है।
- आरंग थाना: पिछले 45 दिनों में 26 मामले दर्ज किए गए, जिसमें 35 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई और 675 पौवा अवैध शराब जब्त की गई।
- मंदिर हसौद थाना: यहां भी 26 मामले दर्ज कर 26 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और 423 पौवा शराब बरामद की गई।
- खरोरा थाना: इस इलाके में भी 26 मामले दर्ज हुए और कुल 513 पौवा अवैध शराब जब्त की गई।
इन तीनों थानों की पुलिस ने महज डेढ़ महीने के भीतर 1,600 से ज्यादा पौवा अवैध शराब जब्त की है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पुलिस इतनी बड़ी मात्रा में अवैध शराब पकड़ रही है, तो क्या आबकारी विभाग पूरी तरह से गहरी नींद में है या फिर उनकी मिलीभगत से यह सब चल रहा है?
सरकारी दुकानों से ही हो रही है तस्करी की सप्लाई
इस पूरे मामले का सबसे चिंताजनक और चौंकाने वाला पहलू यह है कि अवैध कारोबारियों (कोचियों) तक शराब पहुंचाने का काम कोई और नहीं, बल्कि खुद सरकारी शराब दुकानों के कर्मचारी कर रहे हैं।
कुछ समय पहले आरंग पुलिस ने गुल्लू स्थित सरकारी शराब दुकान पर एक बहुत बड़ा छापा मारा था। इस कार्रवाई में दुकान के सुपरवाइजर, सेल्समैन, मल्टी-वर्कर और यहाँ तक कि एक संकुल समन्वयक शिक्षक समेत कुल 7 लोगों को शराब की तस्करी करते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया था। जब सरकारी तंत्र के जिम्मेदार कारिंदे ही इस तरह के अवैध धंधों में शामिल मिलें, तो आबकारी अधिकारियों की संलिप्तता पर संदेह होना बिल्कुल स्वाभाविक है।