अधिकारी और लिपिक पर आरोप: दिव्यांगों की योजनाओं में अनियमितता, जांच की मांग

दिव्यांगों के अधिकार की अनियमितता


जांजगीर-चांपा: अधिकारियों पर दिव्यांगों की योजनाओं में गड़बड़ी के आरोप, जांच की हो रही है मांग

जांजगीर-चांपा जिले में दिव्यांगों को मिलने वाली योजनाओं में अनियमितताओं के आरोप लगते हुए, स्थानीय दिव्यांग संगठनों ने जांच की मांग की है। आरोप है कि सक्ती जिले के प्रभारी सहायक संचालक और जांजगीर कार्यालय के लिपिक ने न केवल फर्जी बिलिंग कर सरकारी राशि का दुरुपयोग किया है, बल्कि दिव्यांगों को मिलने वाली योजनाओं के लाभ में भी घोटाले की ओर इशारा किया है।

क्या हैं आरोप?

दिव्यांगों द्वारा मुख्यमंत्री निवास में लगाए गए जनदर्शन के दौरान एक ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें आरोप लगाए गए हैं कि संबंधित अधिकारी और लिपिक ने दिव्यांगों को मिलने वाली योजनाओं से संबंधित राशि को न केवल रोक रखा है, बल्कि कुछ मामलों में घूस मांगने की भी बातें सामने आई हैं। ज्ञापन में यह भी दावा किया गया है कि दिव्यांगों को योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए भारी रकम का भुगतान करना पड़ता है, जो पूरी तरह से नियमों के खिलाफ है।

आरोपित योजनाओं में गड़बड़ी

  • निःशक्त विवाह प्रोत्साहन योजना: इस योजना के तहत दिव्यांगों को विवाह के लिए प्रोत्साहन राशि दी जाती है, लेकिन आरोप है कि 10 से 20 हजार रुपये की राशि बिना किसी शुल्क के नहीं दी जाती।
  • राष्ट्रीय परिवार सहायता योजना: इस योजना में दिव्यांगों को 3,000 रुपये का सहायता मिलती है, लेकिन इसके लिए भी राशि देने के पहले 3,000 रुपये की रिश्वत की मांग की जाती है।
  • मुख्यमंत्री तीर्थ यात्री योजना: दिव्यांगों के लिए तीर्थ यात्रा की योजना के तहत 3 से 5 हजार रुपये की राशि बिना रिश्वत के नहीं दी जाती।
  • सहायक उपकरण और ट्रायसायकल: दिव्यांगों को ट्रायसायकल और सहायक उपकरण दिए जाते हैं, लेकिन इसके लिए भी 3 से 5 हजार रुपये की राशि की मांग की जाती है।

प्रभारी सहायक संचालक और लिपिक के खिलाफ आरोप

ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया है कि प्रभारी सहायक संचालक सप्ताह में केवल एक-दो दिन ही सक्ती पहुंचते हैं, जबकि अधिकांश समय जांजगीर कार्यालय में रहकर कामकाज का संचालन करते हैं। ऐसे में उनके द्वारा तय की गई योजनाओं का संचालन सही तरीके से नहीं हो पा रहा है, जिससे दिव्यांगों को मिलने वाली सुविधाएं प्रभावित हो रही हैं।

जांच की मांग और कलेक्टर को पत्र

दिव्यांग संगठनों ने इस मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय से कार्रवाई की मांग करते हुए कलेक्टर से जांच कर प्रतिवेदन मांगा है। आरोप है कि अधिकारियों की मिलीभगत से दिव्यांगों के अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है, और इस घोटाले की जांच आवश्यक है।

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