“छत्तीसगढ़ में कोचली जलाशय योजना के लिए 19 करोड़ रुपये की स्वीकृति, 500 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा का मिलेगा लाभ”

कोचली जलाशय योजना


कोचली जलाशय योजना: 19 करोड़ रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति
छत्तीसगढ़ शासन ने बलरामपुर जिले के विकासखंड-बलरामपुर में प्रस्तावित कोचली जलाशय योजना के लिए 19 करोड़ 39 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की है। यह योजना न केवल क्षेत्र के कृषि कार्यों को लाभान्वित करेगी, बल्कि किसानों को सिंचाई की बेहतर सुविधा भी उपलब्ध कराएगी।

इस योजना के तहत 350 हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ और 150 हेक्टेयर में रबी फसलों के लिए सिंचाई की व्यवस्था होगी, जिससे कुल 500 हेक्टेयर क्षेत्र में कृषि गतिविधियों में सुधार होगा। यह परियोजना किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी, जो मौजूदा समय में पानी की कमी और सिंचाई सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं।

मुख्य अभियंता को स्वीकृति
इस योजना को पूरा करने के लिए मुख्य अभियंता हसदेव गंगा कछार जल संसाधन विभाग, अम्बिकापुर को प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। योजना के तहत जलाशय निर्माण और सिंचाई बुनियादी ढांचे के सुधार पर काम किया जाएगा। यह परियोजना न केवल बलरामपुर जिले के किसानों की स्थिति को मजबूत करेगी, बल्कि पूरे क्षेत्र की कृषि संभावनाओं को भी बढ़ावा देगी।


ज्ञान भारतम् अभियान: पांडुलिपि सर्वेक्षण की शुरुआत

पांडुलिपि सर्वेक्षण का शुभारंभ
राज्य सरकार के ज्ञान भारतम् अभियान के अंतर्गत एमसीबी जिले में पांडुलिपि (हस्तलिखित ग्रंथ) सर्वेक्षण की प्रक्रिया शुरू की गई है। इस अभियान का उद्देश्य प्राचीन पांडुलिपियों का संरक्षण और डिजिटलीकरण करना है, ताकि भारतीय संस्कृति और इतिहास को सुरक्षित रखा जा सके।

सर्वेक्षकों की नियुक्ति और निर्देश
इस अभियान के लिए तीन मास्टर ट्रेनर और 137 सर्वेक्षकों को नियुक्त किया गया है। सर्वेक्षकों को जिले के सभी ग्राम पंचायतों में पांडुलिपि सर्वेक्षण कार्य शुरू करने के लिए निर्देश दिए गए हैं। इस अभियान के दौरान, 60-70 वर्ष पुरानी पांडुलिपियाँ अधिक महत्त्वपूर्ण मानी जा रही हैं, और ऐसे दस्तावेज़ पुस्तकालयों, मंदिरों और निजी संग्रहों में मिल सकते हैं।

चिरमिरी में पांडुलिपि डिजिटलीकरण
चिरमिरी निवासी प्रदीप कुमार बेहरा, जो एक व्याख्याता हैं, के घर पर ज्ञान भारतम् अभियान के अंतर्गत पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण किया गया। 1850 के आसपास की उड़िया भाषा की लगभग छह पांडुलिपियाँ डिजिटलीकरण के लिए संग्रहित की गईं। इस मौके पर जिला नोडल अधिकारी डॉ. विनोद पांडेय, महापौर रामनरेश राय, और रितेश श्रीवास्तव ने प्रदीप बेहरा की पांडुलिपियाँ देखकर उनकी सराहना की। महापौर ने जन जागरूकता अभियान के तहत सभी से इस अभियान में सहयोग की अपील की। कलेक्टर डी राहुल वेंकट ने भी पांडुलिपि संग्रहण के लिए प्रदीप बेहरा को बधाई दी और इस पहल की सराहना की।

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