“छत्तीसगढ़ देश में सबसे ज्यादा MBBS सीटें केंद्र को दे रहा, स्थानीय छात्रों के मौके घटे”

MBBS सीटें छत्तीसगढ़


छत्तीसगढ़ से केंद्र को जा रही MBBS सीटें

छत्तीसगढ़ देश में हर साल सबसे ज्यादा MBBS सीटें सेंट्रल पूल में देने वाला राज्य बन गया है। वर्तमान में प्रदेश से 38 मेडिकल सीटें केंद्र को भेजी जा रही हैं, जो सरकारी मेडिकल सीटों का लगभग तीन फीसदी हिस्सा हैं।

इस व्यवस्था के कारण स्टेट कोटे की सीटें लगातार कम हो रही हैं और इसका सीधा असर प्रदेश के स्थानीय छात्रों पर पड़ रहा है।


बड़े राज्यों से ज्यादा सीटें दे रहा छोटा राज्य

विशेषज्ञों का कहना है कि सेंट्रल पूल में सीटें देना स्वैच्छिक है। लेकिन छत्तीसगढ़ इसे लंबे समय से अनिवार्य परंपरा की तरह लागू कर रहा है।

कुल आंकड़े देखें तो:

राज्यकेंद्र को दी जाने वाली सीटें
छत्तीसगढ़38
मध्यप्रदेश28
बिहार26
दिल्ली25
राजस्थान24
केरल24
उत्तरप्रदेश21
महाराष्ट्र16
झारखंड15
पं. बंगाल10
असम6
उत्तराखंड4
चंडीगढ़3
हरियाणा1

यह दिखाता है कि छोटा राज्य ज्यादा सीटें दे रहा है जबकि बड़े राज्यों की संख्या कम है।


सेंट्रल पूल का उद्देश्य और समस्या

सेंट्रल पूल का मूल उद्देश्य था कि नक्सल प्रभावित और उग्रवाद प्रभावित इलाकों के छात्रों को मेडिकल शिक्षा में अवसर मिले।

  • शुरुआत में उत्तर-पूर्व और जम्मू-कश्मीर के छात्रों को लाभ मिला।
  • अब इन क्षेत्रों में मेडिकल सीटें बढ़ चुकी हैं।
  • छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित छात्रों को अपेक्षित लाभ नहीं मिला; पिछले कुछ वर्षों में केवल एक-दो छात्रों ने इस कोटे का फायदा उठाया।

नए मेडिकल कालेजों से बढ़ेगा असर

प्रदेश में इस वर्ष पाँच नए मेडिकल कालेज शुरू होने की संभावना है। यदि प्रत्येक कालेज में 250 सीटें स्वीकृत होती हैं तो करीब 8 सीटें प्रति कालेज सेंट्रल पूल में चली जाएंगी।

इसका मतलब है कि मेडिकल सीटों की कुल संख्या बढ़ने के बावजूद स्थानीय छात्रों के लिए उपलब्ध सीटें नहीं बढ़ेंगी


विशेषज्ञों की राय

  • प्रदेश में डॉक्टरों की जरूरत और बढ़ती प्रतिस्पर्धा को देखते हुए सरकार को सेंट्रल पूल नीति की समीक्षा करनी चाहिए
  • हर साल 38 सीटें केंद्र को भेजने से स्टेट कोटे की सीटें घट रही हैं और स्थानीय छात्रों के लिए प्रवेश कठिन होता जा रहा है।

डीएमई का बयान

चिकित्सा शिक्षा संचालक डॉ. यूएस पैकरा ने कहा कि:

“प्रदेश से सेंट्रल पूल में तीन फीसदी एमबीबीएस सीटें देने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। नियमानुसार सीटें उपलब्ध कराई जा रही हैं।”

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