ग्राम पंचायत सितरम
ग्राम पंचायत सितरम में कलेक्टर ने लगाई चौपाल
उत्तर बस्तर कांकेर जिले की ग्राम पंचायत सितरम में आज का दिन ग्रामीणों के लिए ऐतिहासिक रहा। लंबे समय तक नक्सलवाद के प्रभाव में रहने वाले इस क्षेत्र के ग्रामीणों को जिले के कलेक्टर श्री निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर ने सीधे अपने बीच बैठकर समस्याएं सुनने का अवसर दिया।
बस्तर मुन्ने और सुशासन तिहार के तहत आयोजित शिविर में कलेक्टर ने ग्रामवासियों को शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि अब नक्सलवाद समाप्त हो चुका है और प्राथमिकता के साथ विकास कार्यों को क्रियान्वित किया जाएगा।
निरीक्षण और विकास कार्य
कलेक्टर ने ग्राम पंचायत सितरम का निरीक्षण करते हुए निम्नलिखित कार्यों की स्वीकृति दी:
- सामुदायिक भवन और घोटुल भवन का जीर्णोद्धार।
- दंतेश्वरी माई मंदिर का जीर्णोद्धार।
- शहीद गैंद सिंह स्मारक परिसर का अवलोकन।
- राजस्व और वन भूमि का सीमांकन, वन अधिकार पट्टों का वितरण।
उन्होंने ग्रामीणों से बारी-बारी चर्चा कर उनकी समस्याओं को समझा और यथासंभव समाधान का आश्वासन दिया।
ग्रामीणों की समस्याएं और मांगें
ग्राम पंचायत सितरम के सरपंच श्री गणेश नायक ने कलेक्टर को निम्नलिखित मांगों से अवगत कराया:
- राजा मुंडा शाला भवन और प्री-मेट्रिक छात्रावास का निर्माण।
- देवगुड़ी और सर्व समाज सामुदायिक भवन का निर्माण।
- हाई मास्ट सोलर लाइट और सीसी रोड का निर्माण।
- मिट्टी-मुरूम सड़कों की मरम्मत।
- वन अधिकार पट्टों और जॉब कार्ड धारकों का लाभ सुनिश्चित करना।
साथ ही उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायत सितरम में 254 परिवार और 1169 नागरिक हैं, और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 121 आवास स्वीकृत हैं।
टापूनुमा ग्राम का इतिहास और वर्तमान सुधार
बारिश के मौसम में ग्राम सितरम दो नदियों के बीच टापूनुमा क्षेत्र बन जाता है, जिससे यह 3–4 महीने तक बाहरी संपर्क से कट जाता था। यही कारण था कि यह क्षेत्र माओवादियों का सुरक्षित ठिकाना माना जाता था। अब राज्य शासन की मंशा के अनुसार, ऐसे पिछड़े और दुर्गम क्षेत्रों में प्राथमिकता से विकास कार्य किए जा रहे हैं।
कलेक्टर की चौपाल और ग्रामीणों से संवाद ने इस क्षेत्र में विकास की नई उम्मीद जगा दी है। अब ग्राम पंचायत सितरम के ग्रामीण भी सीधे प्रशासन से जुड़े हैं और भविष्य में योजनाओं का लाभ सुनिश्चित होगा।
बुलेट पॉइंट में प्रमुख सुधार
- ग्रामीणों के लिए सीधे प्रशासनिक संवाद का मंच।
- सामुदायिक भवन, घोटुल भवन और मंदिर का जीर्णोद्धार।
- सड़क, सोलर लाइट और अन्य आधारभूत ढांचे का विकास।
- वन अधिकार और राशन/आधार/आयुष्मान कार्ड वितरण।
- राज्य शासन की प्राथमिकता के तहत दुर्गम क्षेत्र में विकास।