अमित शाह लद्दाख दौरा कांग्रेस
कांग्रेस ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के लद्दाख दौरे पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस संचार विभाग प्रभारी जयराम रमेश ने शाह की यात्रा पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि शाह श्री शुक्रवार को पिपरहवा के बौद्ध अवशेषों की “महिमा” में व्यस्त रहे, जबकि लद्दाख के लोगों की मूलभूत मांगों पर चुप्पी साधे रखी। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि शाह, जो ऐतिहासिक और धार्मिक घटनाओं का जिक्र कर रहे थे, वे लद्दाख के लोगों की राज्य का दर्जा, छठी अनुसूची का दर्जा, और भूमि एवं रोजगार की सुरक्षा जैसे अहम मुद्दों से नजरअंदाज कर रहे हैं।
कांग्रेस का ऐतिहासिक जिक्र
जयराम रमेश ने शाह के लद्दाख दौरे के दौरान ऐतिहासिक संदर्भ का हवाला देते हुए कहा कि लद्दाख में ऐसे धार्मिक और ऐतिहासिक आयोजनों का एक लंबा इतिहास रहा है। कांग्रेस नेता ने 14 जनवरी 1949 की घटना का उल्लेख किया, जब भगवान बुद्ध के दो प्रमुख शिष्य, सारिपुत्र और महामोग्गलान के पवित्र अवशेषों को 1851 में विक्टोरिया और अलबर्ट संग्रहालय से भारत लाया गया। इन अवशेषों को तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने प्राप्त कर, महाबोधि सोसाइटी ऑफ इंडिया को कोलकाता में सौंप दिया था। रमेश ने इस घटना को याद करते हुए कहा कि इससे यह स्पष्ट होता है कि लद्दाख में ऐतिहासिक और धार्मिक आयोजनों का महत्व सिर्फ धार्मिक आस्था के लिए नहीं, बल्कि लोकों के साथ संवाद और उनके भावनाओं का सम्मान करने के लिए भी था।
नेहरू का लद्दाख दौरा
कांग्रेस नेता ने यह भी बताया कि 1949 में नेहरू ने खुद लद्दाख का दौरा किया था और इस दौरान बौद्ध नेता कुशोक बकुला रिनपोछे ने उनसे आग्रह किया था कि भगवान बुद्ध के अवशेषों को लद्दाख भी लाया जाए। नेहरू की पहल के बाद, मई 1950 में इन अवशेषों को 79 दिनों तक लद्दाख में प्रदर्शित किया गया, और बाद में ये यांगून, कोलंबो और सांची में भी स्थापित किए गए। रमेश ने कहा कि यह इतिहास गवाह है कि ऐसे आयोजनों का उद्देश्य केवल धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि लोगों से संवाद करना और उनकी भावनाओं का सम्मान करना भी था।
शाह का दौरा और कांग्रेस की प्रतिक्रिया
रमेश ने कहा कि शाह के दौरे के दौरान लद्दाख के लोकप्रिय मुद्दों को दरकिनार कर दिया गया और शाह सिर्फ ऐतिहासिक और धार्मिक घटनाओं का हवाला देते रहे। कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि यदि शाह चाहते तो लद्दाख के विकास के लिए इन मुद्दों को संबोधित कर सकते थे, लेकिन उनकी यात्रा का मुख्य उद्देश्य केवल ऐतिहासिक संदर्भों को तूल देना था, न कि वास्तविक समस्याओं का समाधान करना।
कांग्रेस का यह आरोप, खासकर लद्दाख की राज्य का दर्जा, छठी अनुसूची का दर्जा और भूमि सुरक्षा जैसे मुद्दों को लेकर, यह बताता है कि पार्टी शाह के लद्दाख दौरे को राजनीतिक दृष्टिकोण से भी देख रही है। इस मुद्दे पर अब दोनों पक्षों के बीच एक नया राजनीतिक विवाद उठने की संभावना है।