42°C की भीषण गर्मी में खुल रहे स्कूल! भड़के पालक बोले- बच्चे को कुछ हुआ तो जिम्मेदार कौन?

स्कूल खुलने

छत्तीसगढ़ में 16 जून से नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत होने जा रही है, लेकिन स्कूल खुलने से पहले ही सरकार का फैसला विवादों में घिर गया है। प्रदेश के कई जिलों में तापमान 42 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है और लू का असर लगातार जारी है। ऐसे हालात में अभिभावक, शिक्षाविद् और स्कूल संगठन बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जता रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग की ओर से जारी लू नियंत्रण एडवाइजरी में छोटे बच्चों को तेज धूप और गर्मी से बचाने की सलाह दी गई है। इसके बावजूद स्कूल खोलने के निर्णय ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अभिभावकों का कहना है कि जब मौसम इतना खतरनाक बना हुआ है, तब बच्चों को स्कूल भेजना जोखिम भरा साबित हो सकता है।

पालकों ने सरकार के फैसले पर उठाए सवाल

स्कूल खुलने से पहले ही पैरेंट्स एसोसिएशन ने सरकार के फैसले का विरोध शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए।

अभिभावकों के प्रमुख सवाल:

  • क्या सभी स्कूलों में बिजली की पर्याप्त व्यवस्था है?
  • क्या प्रत्येक कक्षा में पंखे संचालित हैं?
  • क्या बच्चों के लिए ठंडे और स्वच्छ पेयजल की सुविधा उपलब्ध है?
  • लू की स्थिति में स्वास्थ्य आपातकालीन व्यवस्था क्या है?
  • यदि किसी बच्चे की तबीयत बिगड़ती है तो जवाबदेही किसकी होगी?

पालकों का मानना है कि केवल स्कूल खोल देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

सरकारी स्कूलों की व्यवस्थाओं पर उठ रहे सवाल

ग्रामीण क्षेत्रों के कई सरकारी स्कूलों में अब भी बुनियादी सुविधाओं की कमी की शिकायतें सामने आ रही हैं। कई स्कूलों में बिजली कनेक्शन नहीं है, जबकि अनेक क्षेत्रों में लगातार बिजली कटौती की समस्या बनी हुई है।

समस्याएं जिन पर चिंता जताई जा रही है:

  • बिजली की अनुपलब्धता
  • पंखों की कमी
  • अत्यधिक गर्म कक्षाएं
  • पेयजल की अपर्याप्त व्यवस्था
  • गर्मी से बचाव के संसाधनों का अभाव

अभिभावकों का कहना है कि जिस गर्मी में घरों के कूलर और एसी भी राहत नहीं दे पा रहे, वहां छोटे बच्चे घंटों स्कूल में कैसे बैठ पाएंगे।

शिक्षाविदों ने भी जताई चिंता

शिक्षा क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने भी सरकार से पुनर्विचार करने की अपील की है। उनका कहना है कि स्कूल शुरू करने से पहले सभी संस्थानों में आवश्यक व्यवस्थाओं की जांच और सुधार होना चाहिए।

शिक्षाविदों का सुझाव:

  • स्कूलों में बिजली और पंखों की उपलब्धता सुनिश्चित हो।
  • स्वच्छ पेयजल और प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था हो।
  • गर्मी कम होने तक वैकल्पिक समय-सारणी पर विचार किया जाए।
  • छोटे बच्चों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जाए।

स्कूल संगठन भी फैसले से सहमत नहीं

प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव गुप्ता ने भी कहा कि सरकार को वर्तमान मौसम की गंभीरता को ध्यान में रखना चाहिए। उनका मानना है कि पहले सभी स्कूलों में आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित की जानी चाहिए, उसके बाद ही नियमित संचालन शुरू करना उचित होगा।

डॉक्टरों ने दी सावधानी बरतने की सलाह

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार छोटे बच्चे हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन के सबसे आसान शिकार होते हैं। वर्तमान में अस्पतालों में अभी भी गर्मी और लू से प्रभावित मरीज पहुंच रहे हैं।

डॉक्टरों के अनुसार:

  • तेज धूप में यात्रा बच्चों के लिए खतरनाक हो सकती है।
  • शरीर में पानी की कमी तेजी से हो सकती है।
  • लंबे समय तक गर्म वातावरण में रहने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
  • छोटे बच्चों को विशेष सुरक्षा की जरूरत होती है।

चिंता और बहस के बीच खुलेंगे स्कूल

16 जून से स्कूल खुलने की तैयारी पूरी कर ली गई है, लेकिन फैसले को लेकर बहस जारी है। अभिभावक और शिक्षा जगत से जुड़े लोग सरकार से एक बार फिर परिस्थितियों की समीक्षा करने की मांग कर रहे हैं।

फिलहाल प्रदेश में स्कूल खुलने को लेकर उत्साह से ज्यादा चिंता का माहौल दिखाई दे रहा है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर प्रशासन आगे क्या कदम उठाता है।

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