मादा नीलगाय शिकार
पिथौरा: ग्रामीणों का नीलगाय का शिकार, वन विभाग की त्वरित कार्रवाई से दो गिरफ्तार, बाकी आरोपी फरार
महासमुंद जिले के पिथौरा वन परिक्षेत्र में मादा नीलगाय का शिकार करने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। सुखीपाली गांव के ग्रामीणों ने एक मादा नीलगाय को कुल्हाड़ी से हमला कर मार डाला और उसके मांस को पकाने की तैयारी कर ली थी, लेकिन इससे पहले ही वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। चार अन्य आरोपी फरार हो गए हैं, जिनकी तलाश में वन विभाग की टीम जुटी है।
घटना का समय और तरीका:
सुखीपाली गांव के शांतिनगर निवासी आरोपी ईश्वर कुमार और टंकधर रात्रे सोमवार सुबह तेंदूपत्ता तोड़ने के लिए भालुडोंगरी की ओर जा रहे थे। तभी उनकी नजर थकी हुई मादा नीलगाय पर पड़ी, जिसे कुत्तों ने दौड़ा-दौड़ा कर थका दिया था। इस मौके का फायदा उठाते हुए दोनों ने उसपर कुल्हाड़ी से हमला किया, जिससे नीलगाय की मौत हो गई।
पकाने की तैयारी, वन विभाग ने किया कार्रवाई:
नीलगाय की हत्या करने के बाद आरोपी उसे पास के खेत में लेकर गए और मांस पकाने की तैयारी करने लगे। उसी समय अन्य ग्रामीण भी मौके पर पहुंचे और पकाने में मदद करने लगे। लेकिन किसी ने इसकी जानकारी वन विभाग को दे दी, जिसके बाद वन परिक्षेत्र अधिकारी सुखराम निराला अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। टीम ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया, जबकि बाकी आरोपी फरार हो गए।
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज:
वन विभाग ने गिरफ्तार किए गए आरोपियों से पूछताछ की और सुरेंद्र झरेखा को भी गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में मुख्य आरोपी ईश्वर कुमार, टंकधर रात्रे, सचिन प्रधान और विद्याधर प्रधान फरार हैं। वन विभाग ने वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है और फरार आरोपियों की तलाश जारी है।
वन परिक्षेत्र अधिकारी का बयान:
वन परिक्षेत्र अधिकारी सुखराम निराला ने बताया कि मृत नीलगाय मादा थी, जिसकी उम्र लगभग 4 साल थी। उन्होंने कहा कि घटना की चश्मदीद महिलाओं से बयान भी लिए गए हैं और नीलगाय के शव का पोस्टमार्टम कराए जाने के बाद नियमानुसार अंतिम संस्कार किया जाएगा।
मामले में वन विभाग की सतर्कता:
- वन्यजीव संरक्षण: इस घटना से यह साफ है कि वन विभाग की सतर्कता से अवैध शिकार पर कड़ी नज़र रखी जा रही है। वन विभाग ने शीघ्र कार्रवाई करते हुए शिकारियों को पकड़ने में सफलता प्राप्त की।
- पारिस्थितिकी संतुलन की रक्षा: मादा नीलगाय की हत्या केवल एक वन्यजीव का शिकार नहीं, बल्कि जैव विविधता के लिए गंभीर खतरा है। वन विभाग की कार्यवाही इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
गिरना गांव में हिरण घायल
इस घटनाक्रम के साथ ही एक और मामला सामने आया, जिसमें गिरना गांव के जंगल में एक हिरण पेड़ से टकरा गया और गंभीर रूप से घायल हो गया। वन विभाग ने घायल हिरण को प्राथमिक उपचार दिया और बाद में उसे ठीक होने के बाद जंगल में छोड़ दिया।