दिव्यांगजनों के लिए सहायक उपकरण
महासमुंद में दिव्यांगजनों के लिए निःशुल्क सहायक उपकरण शिविर: 24 से 30 अप्रैल तक
महासमुंद, छत्तीसगढ़:
महासमुंद जिले में दिव्यांगजनों के लिए एक महत्वपूर्ण और सहायक कदम उठाया जा रहा है। 24 अप्रैल से लेकर 30 अप्रैल 2026 तक जिले भर में निःशुल्क सहायक उपकरण मूल्यांकन शिविरों का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यक्रम का उद्देश्य दिव्यांगजनों को उनके जीवन को सरल और सशक्त बनाने के लिए आवश्यक सहायक उपकरण उपलब्ध कराना है। यह आयोजन एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी इंडिया लिमिटेड (AIC) के कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (CSR) कार्यक्रम के तहत और भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम (एलिम्को), जबलपुर के सहयोग से किया जा रहा है।
शिविरों का आयोजन और प्रक्रिया
इन शिविरों में दिव्यांगजनों का परीक्षण किया जाएगा और उनकी आवश्यकता के अनुसार सहायक उपकरणों का चयन किया जाएगा। यह शिविर प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक विभिन्न विकासखंड मुख्यालयों में आयोजित होंगे। इस पहल का उद्देश्य दिव्यांगजनों के जीवन को बेहतर बनाना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।
शिविरों की निर्धारित तिथियाँ और स्थान इस प्रकार हैं:
- 24 अप्रैल: सरायपाली विकासखंड
- 27 अप्रैल: बसना
- 28 अप्रैल: पिथौरा
- 29 अप्रैल: बागबाहरा
- 30 अप्रैल: महासमुंद जनपद पंचायत मुख्यालय
इन शिविरों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक टीम दिव्यांगजनों की जांच करेगी और उन्हें उनके अनुरूप सहायक उपकरण प्रदान करने की प्रक्रिया शुरू करेगी।
आवश्यक दस्तावेज
इस शिविर में भाग लेने के लिए दिव्यांगजनों को कुछ दस्तावेज साथ लाने होंगे, जिनमें शामिल हैं:
- यूडीआईडी कार्ड
- दिव्यांग प्रमाण पत्र
- आय प्रमाण पत्र (जो यह दर्शाता हो कि मासिक आय 22,500 रुपये से कम हो)
- निवास प्रमाण पत्र
- आधार कार्ड
- तीन पासपोर्ट साइज फोटो (जिसमें दिव्यांगता स्पष्ट रूप से दर्शाई गई हो)
आयोजन की नोडल प्रभारी
इस शिविर का संचालन श्रीमती सुनीता तिर्की, परिवीक्षा अधिकारी द्वारा किया जाएगा। वे शिविरों के संचालन और लाभार्थियों के चयन की प्रक्रिया में मार्गदर्शन करेंगी।
प्रशासन का उद्देश्य और प्रभाव
इस पहल का मुख्य उद्देश्य है कि कोई भी पात्र दिव्यांगजन सहायक उपकरणों के लाभ से वंचित न रहे और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का अवसर मिल सके। जिला प्रशासन ने सभी संबंधित विभागीय अधिकारियों, ग्राम पंचायत सचिवों और स्थानीय निकायों को निर्देशित किया है कि वे इन शिविरों का व्यापक प्रचार-प्रसार करें ताकि अधिक से अधिक दिव्यांगजन इसका लाभ उठा सकें।
इस कार्यक्रम से ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के दिव्यांगजनों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है। इससे न केवल उनकी जीवन गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि सामाजिक समावेशन को भी बढ़ावा मिलेगा।
इस पहल से दिव्यांगजनों को न सिर्फ सहायक उपकरण मिलेंगे, बल्कि उन्हें समाज में आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी मिलेगा, जो उनके जीवन को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।