“हाईवे पेड़ों की कटाई में बड़ी लापरवाही: स्वीकृत एलाइनमेंट से बाहर 8 हजार पेड़ काटे गए”

पेड़ कटाई


धमतरी-जगदलपुर हाईवे: स्वीकृत एलाइनमेंट से बाहर हजारों पेड़ों की कटाई!

रायपुर। धमतरी-जगदलपुर राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-30) के चौड़ीकरण के दौरान पेड़ों की कटाई में गंभीर लापरवाही सामने आई है। वन विभाग की जांच में खुलासा हुआ है कि हजारों पेड़ स्वीकृत एलाइनमेंट से हटकर काटे गए। इस मामले ने वन विभाग और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के हाथ-पांव फूलने पर मजबूर कर दिया।

मामले का पूरा विवरण:

  • वर्ष 2017 में धमतरी-जगदलपुर हाईवे के उन्नयन के लिए बालोद, कांकेर, कोण्डागांव और बस्तर जिलों के वन क्षेत्रों की 402.423 हेक्टेयर भूमि का डायवर्सन स्वीकृत किया गया।
  • इस परियोजना के तहत केशकाल वनमंडल में कुल 10,731 पेड़ों की कटाई की अनुमति दी गई थी।
    • फरसगांव-बड़ेडोंगर क्षेत्र: 1,545 पेड़
    • केशकाल परिक्षेत्र: 9,186 पेड़
  • हालांकि, निर्माण कार्य लंबी अवधि तक बंद रहा और मार्च 2026 में जब सड़क निर्माण पुनः शुरू हुआ, तब एलाइनमेंट में गड़बड़ी का पता चला।

जांच में सामने आया चौंकाने वाला तथ्य:

  • उप-वनमंडलाधिकारी केशकाल की अध्यक्षता में गठित जांच समिति ने पाया कि लगभग 8,159 पेड़ अवैध रूप से स्वीकृत एलाइनमेंट से बाहर काटे गए
  • गलत कटाई के कारण अब स्वीकृत एलाइनमेंट में सड़क बनाने के लिए 6,336 अतिरिक्त पेड़ों को काटना अनिवार्य हो गया है।

कौन जिम्मेदार है?

  • आश्चर्य की बात यह है कि निर्माण कार्य की निगरानी करने वाला लोक निर्माण विभाग इस अवैध कटाई की जानकारी तक नहीं पा सका।
  • उच्च स्तर से निर्देश मिलने के बाद कलेक्टर अविनाश मिश्रा और वनमंडलाधिकारी कृष्ण जाधव ने तत्काल कार्रवाई के आदेश दिए।

वन विभाग की कार्रवाई और भविष्य की योजना:

  • भविष्य में ऐसी गलतियों को रोकने के लिए तकनीकी कर्मचारियों द्वारा एलाइनमेंट में चिन्हित पेड़ों का दोबारा सत्यापन किया जाएगा।
  • वर्ष 2016-17 में स्वीकृत क्षेत्र के बाहर पेड़ काटने वाले तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
  • वन विभाग ने यह भी सुनिश्चित किया है कि भविष्य में किसी भी परियोजना में अनधिकृत पेड़ कटाई न हो।

क्या इससे पर्यावरण को नुकसान होगा?

  • अवैध पेड़ कटाई और अतिरिक्त पेड़ों की आवश्यकता से क्षेत्र में हरित आवरण कम होने का खतरा बढ़ गया है।
  • वन विभाग ने जनता को आश्वासन दिया है कि पुनर्वनीकरण और पर्यावरण संरक्षण पर ध्यान दिया जाएगा।

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