जनगणना 2026 नियम, घर संपत्ति छिपाने पर सजा, जनगणना अधिनियम 1948
जनगणना में तथ्य छिपाना भारी पड़ सकता है
भारत में चल रही जनगणना 2026 में अब यह स्पष्ट कर दिया गया है कि यदि कोई व्यक्ति घर, गाड़ी या संपत्ति छिपाता है, तो उसके लिए तीन साल तक की जेल और एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है। यह दंड जनगणना अधिनियम, 1948 की धारा 11 के तहत लागू है।
जिला जनगणना अधिकारी विनीत कुमार सिंह ने बताया कि यह नियम उत्तरदाता और प्रगणक दोनों पर समान रूप से लागू होता है। यदि प्रगणक जनगणना में प्राप्त तथ्यों को बाहर साझा करता है, तो उस पर भी दंड का प्रावधान है।
प्रगणक और पर्यवेक्षक सतर्क
जनगणना के पांचवें दिन भी स्वगणना जारी है। इस दौरान प्रगणक और पर्यवेक्षक सतर्क हैं और वे हर अनियमितता की जांच कर रहे हैं। यदि किसी हाउस लिस्टिंग ब्लॉक में ज्यादा अनियमितताएं पाई जाती हैं, तो प्रगणक जिम्मेदार होंगे। वहीं, किसी ब्लॉक में रहने वालों की संख्या बहुत कम होने पर पुनरीक्षण कराया जा सकता है।
गोरखपुर में चार्ज अधिकारी/एसडीएम सदर दीपक गुप्ता ने कहा कि प्रगणक घर-घर जाएंगे और भौतिक सत्यापन करेंगे। उदाहरण के लिए, यदि किसी मकान में दो या तीन कारें हैं और मकान मालिक केवल एक गाड़ी दर्ज करता है, तो हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट सहित अन्य माध्यमों से इसकी जांच की जाएगी।
फॉर्म में हैरान करने वाले सवाल
जनगणना फॉर्म में कुल 34 सवाल शामिल हैं, जिनमें कुछ सवाल विशेष रूप से ध्यान आकर्षित करते हैं। उदाहरण के लिए, “आपकी पत्नी कितनी हैं?” इस सवाल के आधार पर परिवार की संरचना और दंपति की संख्या निर्धारित होती है। यदि किसी महिला के दो पति हैं तो वह सिंगल फैमिली मानी जाएगी, और यदि पुरुष के दो पत्नियां हैं तो डबल फैमिली दर्ज होगी।
इसके अलावा परिवार का मुखिया किसी भी सदस्य को बनाया जा सकता है—यह जरूरी नहीं कि दादा या पिता ही मुखिया हों। परिवार में बहू, पत्नी, दादी या पुत्री मुखिया हो सकती हैं और उसी के नाम पर फॉर्म भरा जाएगा।