नई दिल्ली: भारत ने रक्षा सहयोग को लेकर इटली के सामने दो टूक और कड़ा रुख रखते हुए साफ कर दिया है कि आतंकवाद को पनाह देने वाले पाकिस्तान तक किसी भी तरह की रक्षा तकनीक पहुंचना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने की बातचीत के बीच भारत ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर कोई ढिलाई नहीं होगी।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उनके इतालवी समकक्ष गुइडो क्रोसेटो के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक में अगली पीढ़ी के हथियार प्रणालियों के को-डेवलपमेंट और उत्पादन पर विस्तार से चर्चा हुई। इटली ने भारतीय कंपनियों के साथ मिलकर विशेष तौर पर को-डेवलपमेंट की इच्छा जताई।
भारत ने बैठक के दौरान इटली को अतीत की उन घटनाओं की भी याद दिलाई, जब उसकी कंपनियों ने पाकिस्तान को नौसैनिक उपकरण, हेलीकॉप्टर, ड्रोन और मिसाइल सिस्टम जैसी रक्षा सामग्री उपलब्ध कराई थी। भारत ने साफ कहा कि ऐसी गतिविधियां भविष्य में द्विपक्षीय संबंधों पर असर डाल सकती हैं।
- इटली की बड़ी रक्षा कंपनी लियोनार्डो, जो वीवीआईपी हेलीकॉप्टर घोटाले के बाद लंबे समय तक भारत में प्रतिबंधों का सामना कर चुकी थी, अब फिर से सक्रिय हो गई है। कंपनी अदानी डिफेंस एंड एयरोस्पेस के साथ मिलकर नौसैनिक हेलीकॉप्टर प्रोजेक्ट में हिस्सेदारी की कोशिश कर रही है।
- इटली ने ट्रेनर एयरक्राफ्ट, एडवांस्ड नेवल गन और टॉरपीडो की आपूर्ति में भी रुचि दिखाई है। भारतीय नौसेना की ओर से WASS से खरीदे गए हेवीवेट टॉरपीडो पर भी चर्चा हुई, साथ ही भारत में टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के साथ उत्पादन यूनिट स्थापित करने की संभावनाएं तलाशी गईं।
- बैठक में ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत रक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया। राजनाथ सिंह ने कहा कि दोनों देशों ने पारस्परिक हितों को ध्यान में रखते हुए रक्षा औद्योगिक सहयोग को आगे बढ़ाने के नए रास्तों पर चर्चा की। साथ ही, 2026-27 के लिए द्विपक्षीय सैन्य सहयोग योजना (MCP) का आदान-प्रदान भी किया गया, जो भविष्य के सैन्य रिश्तों की दिशा तय करेगा।