पहले जय जवान, अब जय किसान। जी हां, लखनऊ के निवासी कर्नल हरिश्चन्द्र सिंह ने सेना से रिटायर होने के बाद ऑर्गेनिक खेती में इतनी लम्बी लकीर खींच दी कि दूसरों के लिए प्रेरणा बन गए। पीएम नरेन्द्र मोदी ने भी अपने कार्यक्रम ‘मन की बात’ में उनकी प्रशंसा की। एक एकड़ में सिर्फ ड्रैगन फ्रूट की खेती से ही 14 लाख रुपये तक सालाना कमा रहे हैं।
मूल रूप से आम्बेडकर नगर निवासी कर्नल हरिश्चन्द्र सिंह अब लखनऊ में बस चुके हैं। रिटायर होने के बाद बाराबंकी के हैदरगढ़ में फार्म लेकर खेती शुरू की। कर्नल हरिश्चन्द्र के अनुसार ‘54 वर्ष की उम्र में सैन्य सेवा से रिटायर होने के बाद, अपने जीवन को सक्रिय और सार्थक बनाए रखने के लिए खेती शुरू की। हमने वर्ष 2016 में जनपद बाराबंकी के गांव अमसेरूआ, ब्लॉक सिद्धौर, हैदरगढ़ से जैविक खेती की शुरुआत की। इसकी प्रेरणा का मुख्य स्रोत स्वयं की पारिवारिक पृष्ठभूमि रही। साथ ही जैविक उत्पादों की कमी, बचपन में मिले कृषि क्षेत्र के अनुभव और हरित क्रांति का साक्षी होना भी बड़ा कारण रहा।’
ड्रैगन फ्रूट, चिया सीड, काले आलू की खेती ने बदली किस्मत
कर्नल हरिश्चन्द्र ने चिया सीड, ड्रैगन फ्रूट, एप्पल बेर जिमीकंद और काले-बैगनी आलू की खेती से अपने नए शौक की शुरू की। इसमें काफी हद तक सफल रहे। बाद में अपनी फसलों में केला, लाल गूदे वाला आलू, क्वीनोआ, रामदाना, काला चावल और काले गेहूं आदि को भी शामिल किया।
पीएम मोदी ने की तारीफ
कुछ समय पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चिया सीड की खेती का उल्लेख करते हुए कर्नल हरिश्चन्द्र का उदहारण दिया। साथ ही इसे आत्मनिर्भर भारत में एक बड़ा कदम बताया। अब तो स्वास्थ्यवर्धक और लाभप्रद फसलों, फलों तथा सब्जियों की जैविक खेती करना तथा ज्यादा से ज्यादा किसानों को इस मुहिम से जोड़ना अब उनका जुनून सा बन गया है। वर्ष 2023 में भारत सरकार की ओर से प्रकाशित ‘काफी टेबल बुक’ में उनको एक ‘प्रगतिशील किसान’ के रूप में स्थान दिया गया है।