नारीशक्ति वंदन अधिनियम
प्रधानमंत्री मोदी की ऐतिहासिक अपील: नारीशक्ति वंदन अधिनियम पर मतदान से पहले समर्थन मांगा
भारत में महिला आरक्षण को लेकर लंबे समय से जारी बहस और असहमति के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने “नारीशक्ति वंदन अधिनियम” पर होने वाले वोट से पहले एक ऐतिहासिक अपील की है। उन्होंने लोकसभा के सभी राजनीतिक दलों से इस बिल के पक्ष में मतदान करने की अपील की, ताकि भारत की महिलाओं को उनका अधिकार मिल सके और देश का लोकतंत्र और मजबूत हो सके।
PM मोदी ने इसे एक ऐतिहासिक अवसर बताते हुए कहा, “यह न केवल महिलाओं को उनके अधिकार देने का मौका है, बल्कि यह भारत के लोकतंत्र को सशक्त बनाने का भी अवसर है।”
PM मोदी का संदेश
प्रधानमंत्री ने ट्वीट कर विपक्ष से “नारीशक्ति वंदन अधिनियम” के समर्थन में मतदान करने की अपील की। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि संसद में चर्चा के दौरान सभी आशंकाओं का समाधान किया गया और सभी सांसदों को आवश्यक जानकारी दी गई है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर अब कोई भ्रम नहीं रह गया है और अब समय है कि “देश की आधी आबादी को उनका अधिकार दिया जाए”।
प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि महिला आरक्षण के मुद्दे पर पिछले चार दशकों से राजनीति हो रही थी, लेकिन अब वक्त आ गया है कि इसे नौबत तक पहुंचने से पहले हल किया जाए। उनका कहना था कि “आजादी के इतने सालों बाद भी महिलाओं का निर्णय प्रक्रिया में इतना कम प्रतिनिधित्व सही नहीं है।”
महिलाओं के अधिकार और लोकतंत्र
PM मोदी ने इस बिल का समर्थन करते हुए कहा कि यह सिर्फ “महिलाओं के अधिकार” की बात नहीं है, बल्कि यह भारतीय लोकतंत्र की शक्ति को भी मजबूत करेगा। उन्होंने अपील की कि संसद में यह बिल सर्वसम्मति से पारित होना चाहिए, ताकि देश की नारीशक्ति को एक मजबूत मंच मिल सके।
प्रधानमंत्री ने सांसदों से अपील की, “आप घर में मां, बहन, बेटी और पत्नी का स्मरण करते हुए अपनी अंतरात्मा को सुनिए और सोच-समझकर निर्णय लें।” यह प्रधानमंत्री का भावुक संदेश था जो संसद के सभी सदस्यों से महिला आरक्षण के पक्ष में मतदान करने की अपील करता है।
नारीशक्ति वंदन अधिनियम: एक ऐतिहासिक कदम
नारीशक्ति वंदन अधिनियम एक महत्वपूर्ण विधेयक है जो भारतीय महिलाओं को राजनीति और सार्वजनिक जीवन में अधिक प्रतिनिधित्व देने का उद्देश्य रखता है। इस विधेयक के अर्थपूर्ण संशोधन भारतीय महिलाओं को सत्ता और निर्णय प्रक्रिया में समान भागीदारी का मौका प्रदान करेंगे। इस विधेयक का पारित होना भारतीय महिलाओं के लिए एक ऐतिहासिक पल होगा और यह उनके लोकतांत्रिक अधिकारों की दिशा में एक ठोस कदम होगा।