प्रधानमंत्री मोदी आज हरदोई में 594 किमी लंबे गंगा एक्सप्रेसवे का करेंगे लोकार्पण

उत्तर प्रदेश के विकास में आज एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को हरदोई में देश के सबसे लंबे ग्रीनफील्ड गंगा एक्सप्रेसवे का लोकार्पण करेंगे। लोकार्पण के साथ ही इस पर फर्राटा भी भर सकेंगे। ऐसे में मंगवार की शाम ही टोल टैक्स की दरें भी जारी कर दी गई हैं। बाइक और ट्रैक्टर को भी 1.28 रुपये प्रति किलोमीटर की दर से टोल टैक्स देना होगा। 594 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे शुरू होते ही न केवल मेरठ से प्रयागराज की दूरी सिमट जाएगी, बल्कि उत्तर प्रदेश देश के एक्सप्रेसवे नेटवर्क में 60% हिस्सेदारी के साथ ‘एक्सप्रेसवे प्रदेश’ के रूप में अपनी पहचान और मजबूत करेगा। इसके शुरू होने से प्रदेश में संचालित एक्सप्रेसवे परियोजनाओं की कुल लंबाई 1910 किलोमीटर हो जाएगी। निर्माणाधीन लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का लोकार्पण मई माह में प्रस्तवित है।

टोल दरें तय: बाइक-ट्रैक्टर को भी देना होगा टैक्स

सरकार ने एक्सप्रेसवे पर सफर के लिए टोल की दरें जारी कर दी हैं। खास बात यह है कि इस मार्ग पर बाइक और ट्रैक्टर जैसे वाहनों को भी टोल देना होगा। एक्सप्रेसवे पर वाहनों की अधिकतम रफ्तार 120 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित की गई है।

किसे कितना देना होगा टोल टैक्स

दो पहिया, तीन पहिया और ट्रैक्टर को 1.28 रुपये प्रति किलोमीटर

कार, जीप, वैन व हल्के वाहन को 2.55 रुपये प्रति किलोमीटर

हल्के वाणिज्यिक वाहन, हल्के माल वाहन को 4.05 रुपये प्रति किलोमीटर

मिनी बस, बस व ट्रक को 8.20 रुपये प्रति किलोमीटर

भारी निर्माण मशीनरी, मिट्टी हटाने वाले वाहन को 12.60 रुपये प्रति किलोमीटर

उपकरण व बहुएक्सल वाहन, अत्यधिक बड़े वाहन (सात व अधिक एक्सेल वाले) 16.10 रुपये प्रति किलोमीटर

गंगा एक्सप्रेसवे परियोजना प्रदेश के आर्थिक और सामाजिक ताने-बाने को मजबूत करने के साथ ही यात्रा को तेज, सुरक्षित व सुगम बनाएगी। गंगा एक्सप्रेसवे प्रदेश के 12 जिलों को जोड़ेगा। इसकी लागत लगभग 36,230 हजार करोड़ रुपये आई है। भविष्य में इसे हरिद्वार और जेवर एयरपोर्ट से जोड़े जाने की भी योजना है। प्रदेश सरकार ने कार्यक्रम को लेकर कड़े सुरक्षा प्रबंध किए हैं। सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।गंगा एक्सप्रेसवे मेरठ के बिजौली गांव से शुरू होकर प्रयागराज के जुडापुर दांदू गांव के पास समाप्त होगा। यह मार्ग पश्चिमी उत्तर प्रदेश को सीधे पूर्वी यूपी से जोड़ेगा। गंगा एक्सप्रेसवे से 12 जिले मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज जुड़े हैं। इन 12 जिलों के 519 गांव इस परियोजना से जुड़े हैं, जिससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बढ़ रहीं इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं का यह एक्सप्रेसवे सशक्त उदाहरण है। गंगा एक्सप्रेसवे पर 3.5 किलोमीटर लंबी हवाई पट्टी भी तैयार की गई है, जिस पर वायु सेना के लड़ाकू विमान भी आपात लैंडिंग कर सकेंगे। हापुड़ के ब्रजघाट में गंगा पर एक किलोमीटर और इससे आगे रामगंगा पर 720 मीटर लंबे पुलों से यह एक्सप्रेसवे गुजरता है। इसमें 381 अंडरपास, 14 मुख्य पुल, 126 छोटे पुल और 929 पुलिया शामिल हैं।

गंगा एक्सप्रेसवे पर एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (एटीएमएस) लागू किया जा रहा है, जिससे यातायात प्रबंधन को अत्यधिक स्मार्ट और प्रभावी बनाया जाएगा। उप्र एक्सप्रेसवे इंडस्ट्रियल डेवलमेंट अथार्टी (यूपीडा) के निर्देशन में इस अत्याधुनिक प्रणाली को विकसित किया गया है। इसके तहत एक्सप्रेसवे पर हाई-रिजाल्यूशन सीसीटीवी कैमरे, वेरिएबल मैसेज साइन (वीएमएस), स्पीड मानिटरिंग सिस्टम, इमरजेंसी काल बाक्स और केंद्रीकृत ट्रैफिक कंट्रोल सेंटर स्थापित गए हैं।

अभी प्रदेश में यमुना एक्सप्रेसवे (लंबाई लगभग 165 किलोमीटी), आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे (लंबाई लगभग 302 किलोमीटर), पूर्वांचल एक्सप्रेसवे (लंबाई लगभग 341 किलोमीटर), बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे (लंबाई लगभग 296 किलोमीटर), दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे (लंबाई लगभग 96 किलोमीटर) और गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे (लंबाई लगभग 91 किलोमीटर) संचालित हैं।

गंगा एक्सप्रेसवे देश का सबसे लंबा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे होगा। परियोजना में अदाणी इंटरप्राइजेज लिमिटेड का योगदान सबसे बड़ा है। 594 किलोमीटर लंबे नवनिर्मित गंगा एक्सप्रेसवे में अदाणी समूह ने बदायूं से प्रयागराज तक 464 किलोमीटर (लगभग 80%) हिस्से का निर्माण कार्य कराया है। इस निर्माण कार्य को तीन प्रमुख खंडों में विभाजित किया गया है। इनमें बदायूं से हरदोई तक 151.7 किलोमीटर, हरदोई से उन्नाव तक 155.7 किलोमीटर और उन्नाव से प्रयागराज तक 157 किलोमीटर है। गंगा एक्सप्रेसवे को भविष्य में आठ लेन तक विस्तारित किया जा सकता है। डिजाइन, निर्माण, वित्त, संचालन और हस्तांतरण (डीबीएफओटी) माडल पर आधारित यह परियोजना देश की सबसे लंबी एक्सप्रेसवे परियोजना है।

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