“दिव्यांगता को हराकर रामकली हल्बा बनीं सफलता की मिसाल, 50 हजार के ऋण से खड़ा किया सफल कारोबार”

रामकली हल्बा


छत्तीसगढ़ में सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं जरूरतमंद लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव ला रही हैं। खासकर समाज कल्याण विभाग की स्वरोजगार और ऋण योजनाएं दिव्यांगजनों के लिए नई उम्मीद बनकर सामने आई हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले के ग्राम बिहरीकला निवासी श्रीमती रामकली हल्बा की, जिन्होंने दिव्यांगता को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया और आज आत्मनिर्भरता की मिसाल बन चुकी हैं।

50 हजार के ऋण से शुरू किया कारोबार

अस्थिबाधित दिव्यांग रामकली हल्बा को वर्ष 2011 में समाज कल्याण विभाग से 50 हजार रुपये का ऋण मिला था। इस राशि की मदद से उन्होंने अपने गांव में एक छोटी किराना दुकान शुरू की।

शुरुआत आसान नहीं थी। सीमित संसाधन, आर्थिक परेशानियां और शारीरिक चुनौतियां उनके सामने थीं, लेकिन उन्होंने हार मानने के बजाय मेहनत और आत्मविश्वास के साथ अपने काम को आगे बढ़ाया।

धीरे-धीरे उनकी दुकान गांव में लोकप्रिय होने लगी और ग्राहकों का भरोसा बढ़ता गया।

समय से पहले चुका दिया पूरा ऋण

रामकली हल्बा की मेहनत का सबसे बड़ा परिणाम यह रहा कि उन्होंने करीब डेढ़ से दो साल के भीतर ही पूरा ऋण चुका दिया।

समयपूर्व ऋण अदायगी करने पर उन्हें शासन की ओर से 3,750 रुपये की उत्थान सब्सिडी भी प्रदान की गई। यह उनके अनुशासन और सफल व्यवसाय संचालन का बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।

आज दूसरों को भी दे रही हैं रोजगार

जो महिला कभी आर्थिक संकट से जूझ रही थी, आज वही दूसरों के लिए रोजगार का माध्यम बन चुकी हैं।

उनकी किराना दुकान अब गांव में अच्छी तरह स्थापित हो चुकी है और कई लोगों को रोजगार भी मिल रहा है। उनकी सफलता ने यह साबित कर दिया कि सही अवसर और मजबूत इरादों के साथ कोई भी व्यक्ति अपनी जिंदगी बदल सकता है।

सुशासन तिहार 2026 में मिला सम्मान

रामकली हल्बा की मेहनत और उपलब्धियों को देखते हुए उन्हें सुशासन तिहार 2026 के दौरान सम्मानित भी किया गया।

जनप्रतिनिधियों द्वारा उन्हें:

  • समयपूर्व ऋण चुकाने
  • सफल व्यवसाय संचालन
  • आत्मनिर्भर बनने

के लिए सम्मान प्रदान किया गया।

यह सम्मान उनके संघर्ष और सफलता की सार्वजनिक पहचान बन गया।

महिलाओं और दिव्यांगजनों के लिए बनीं प्रेरणा

आज रामकली हल्बा की कहानी पूरे क्षेत्र में प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है। खासकर महिलाएं और दिव्यांगजन उनसे प्रेरणा ले रहे हैं।

रामकली कहती हैं कि यदि शासन की योजनाओं का सही लाभ लिया जाए और मेहनत के साथ आगे बढ़ा जाए, तो कोई भी व्यक्ति आत्मनिर्भर बन सकता है।

उन्होंने अन्य जरूरतमंद लोगों से भी अपील की है कि वे सरकारी योजनाओं का लाभ लें और खुद का रोजगार शुरू कर आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें।

सरकारी योजनाओं का दिखा सकारात्मक असर

समाज कल्याण विभाग की ऋण योजना ने रामकली हल्बा की जिंदगी बदल दी। यह उदाहरण बताता है कि सरकार की योजनाएं यदि सही लोगों तक पहुंचें, तो वे किसी का भविष्य बदल सकती हैं।

रामकली की सफलता यह संदेश देती है कि दिव्यांगता कभी भी सपनों और सफलता के बीच दीवार नहीं बन सकती।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *