तीजन बाई
रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पद्म विभूषण से सम्मानित महान पंडवानी गायिका तीजन बाई के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने कहा कि तीजन बाई के निधन से छत्तीसगढ़ ने अपनी समृद्ध लोकसंस्कृति का एक अनमोल रत्न खो दिया है। उनके जाने से कला और सांस्कृतिक जगत को अपूरणीय क्षति हुई है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है।
मुख्यमंत्री ने विधानसभा में निधन उल्लेख के दौरान कहा कि तीजन बाई केवल एक कलाकार नहीं थीं, बल्कि वह छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान की सबसे मजबूत आवाज थीं। उन्होंने अपनी अद्भुत प्रतिभा और वर्षों की साधना से पंडवानी गायन को देश-दुनिया में नई पहचान दिलाई।
पंडवानी को वैश्विक मंच तक पहुंचाया
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि तीजन बाई ने पंडवानी गायन की कापालिक शैली को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनकी प्रस्तुति में गायन, अभिनय और भावनाओं का अद्भुत मेल देखने को मिलता था।
उनकी विशेष शैली में—
- पात्रों का जीवंत चित्रण,
- ओजपूर्ण वाणी,
- प्रभावशाली संवाद अदायगी,
- मंच पर शानदार अभिनय
श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देते थे। उनकी कला ने छत्तीसगढ़ की लोक परंपरा को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई।
संघर्ष और समर्पण की मिसाल थीं तीजन बाई
मुख्यमंत्री ने कहा कि तीजन बाई का पूरा जीवन संघर्ष, मेहनत और समर्पण की प्रेरणादायक कहानी है। जिस समय महिलाओं के लिए पंडवानी जैसे लोकगायन क्षेत्र में आगे बढ़ना आसान नहीं था, उस दौर में उन्होंने सामाजिक रूढ़ियों को चुनौती दी और अपनी अलग पहचान बनाई।
उन्होंने अपनी प्रतिभा के दम पर यह साबित किया कि कला और आत्मविश्वास के बल पर हर बाधा को पार किया जा सकता है। यही कारण है कि आज भी देशभर के कलाकार उन्हें अपना प्रेरणास्रोत मानते हैं।
दुनिया भर में बनाई छत्तीसगढ़ की पहचान
मुख्यमंत्री ने कहा कि तीजन बाई ने एशिया, यूरोप सहित दुनिया के कई देशों में अपनी शानदार प्रस्तुतियां देकर छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति को वैश्विक मंच पर स्थापित किया।
उनके योगदान के लिए उन्हें कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
- पद्मश्री सम्मान
- पद्म भूषण सम्मान
- संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार
- पद्म विभूषण सम्मान
वर्ष 2019 में भारत सरकार ने उन्हें देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया था। यह सम्मान पाने वाली वे छत्तीसगढ़ की एकमात्र विभूति थीं।
राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने भी जताया शोक
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बताया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कई केंद्रीय मंत्रियों ने भी तीजन बाई के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी है।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि राज्योत्सव के अवसर पर रायपुर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तीजन बाई के परिजनों से दूरभाष पर बातचीत कर उनका हालचाल जाना था।
लोकसंस्कृति के संरक्षण में योगदान रहेगा अमर
मुख्यमंत्री ने कहा कि कई विश्वविद्यालयों ने तीजन बाई को मानद डी.लिट. की उपाधि से सम्मानित किया था। भारतीय लोकसंगीत और लोकसंस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन में उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि तीजन बाई की कला, साधना और समर्पण आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करने और उसे आगे बढ़ाने की प्रेरणा देता रहेगा।
विधानसभा ने दी श्रद्धांजलि
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने सदन की ओर से दिवंगत पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ईश्वर से प्रार्थना की कि दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें।
उन्होंने शोकाकुल परिवार, उनके लाखों प्रशंसकों और कला जगत के लोगों को इस कठिन समय में दुख सहन करने की शक्ति देने की कामना की।
तीजन बाई भले ही अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी आवाज, उनकी कला और छत्तीसगढ़ की संस्कृति को दुनिया तक पहुंचाने का उनका योगदान हमेशा अमर रहेगा।