रायपुर। देश में प्रदूषण कम करने और विदेशी तेल पर निर्भरता घटाने के लिए सरकार ने पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिलाने (E20) की नीति को लागू कर दिया है। सरकार इसे एक ऐतिहासिक कदम बता रही है, लेकिन जमीन पर इसका एक ऐसा खौफनाक सच सामने आ रहा है जिसने आम जनता की नींद उड़ा दी है। इंटरनेट से लेकर देश के ऑटोमोबाइल गैराजों तक, इस समय केवल एक ही चर्चा है— क्या इथेनॉल मिक्स पेट्रोल आपकी गाड़ियों को अंदर से खोखला कर रहा है?
गाड़ियों के इंजन क्यों हो रहे हैं बर्बाद?
ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों और मैकेनिकों के अनुसार, इथेनॉल मूल रूप से एक अल्कोहल है, जो हवा से नमी (पानी) को बहुत तेजी से सोखता है। जब यह E20 पेट्रोल पुरानी गाड़ियों के फ्यूल टैंक में जाता है, तो टैंक के अंदर जंग लगने लगती है। सबसे गंभीर बात यह है कि इथेनॉल गाड़ियों के फ्यूल पंप, रबर के पाइप और प्लास्टिक के पार्ट्स को धीरे-धीरे गला देता है। इसके कारण चलती गाड़ियां अचानक बंद हो रही हैं और लोगों को इंजन बदलवाने के लिए ₹10,000 से लेकर ₹50,000 तक का भारी फटका लग रहा है।
जनता परेशान, सरकार की नीति पर खड़े हुए बड़े सवाल
इस गंभीर समस्या के बाद अब सीधे सरकार की दूरदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं:
- आम जनता का नुकसान क्यों?: देश में करोड़ों लोग आज भी ऐसी गाड़ियां चला रहे हैं जो केवल शुद्ध पेट्रोल (E0) के लिए बनी हैं। बिना किसी पूर्व तैयारी या चेतावनी के पूरे देश पर E20 पेट्रोल थोपकर आम आदमी की गाढ़ी कमाई को क्यों दांव पर लगाया गया?
- कंपनियों पर नकेल क्यों नहीं?: वाहन निर्माता कंपनियों ने हाल ही में E20 अनुकूल (Compliant) इंजन बनाना शुरू किया है, लेकिन उन करोड़ों पुरानी गाड़ियों का क्या जो पहले से सड़कों पर दौड़ रही हैं? उनके नुकसान की भरपाई कौन करेगा?
- विकल्प क्यों खत्म किया गया?: पेट्रोल पंपों पर आम जनता को यह विकल्प क्यों नहीं दिया जा रहा है कि वे अपनी मर्जी से शुद्ध पेट्रोल या इथेनॉल मिक्स पेट्रोल चुन सकें?
इंटरनेट पर फूटा लोगों का गुस्सा
सोशल मीडिया और इंटरनेट पर लगातार लोग अपनी गाड़ियों के खराब हुए इंजन और फ्यूल पंप के वीडियो शेयर कर सरकार के खिलाफ अपना गुस्सा निकाल रहे हैं। यदि इस नीति में तुरंत सुधार नहीं किया गया या पुरानी गाड़ियों के लिए कोई वैकल्पिक रास्ता नहीं निकाला गया, तो यह देश का सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल संकट बन सकता है।