महाराष्ट्र का सुसाइड हब बना यवतमाल: कर्ज के दलदल में फंसकर किसान चुन रहे मौत, 25 दिन में 18 ने गंवाई जान

महाराष्ट्र के यवतमाल जिले से एक बार फिर रोंगटे खड़े कर देने वाली खबर सामने आ रही है। किसानों की आत्महत्याओं के लिए कुख्यात इस जिले में संकट कम होने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले 72 घंटों के भीतर मारेगांव तहसील में 3 किसानों ने मौत को गले लगा लिया है। सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो 1 से 25 अप्रैल 2026 के बीच कुल 18 किसान अपनी जीवनलीला समाप्त कर चुके हैं। लगातार फसलों की बर्बादी, कर्ज का बढ़ता बोझ और कृषि नीतियों की खामियों को इस गंभीर स्थिति का मुख्य कारण बताया जा रहा है।

यतवमाल जिला प्रशासन के अनुसार आत्महत्या करने वाले किसानों में कैलास गाडगे (पार्डी), विलास मेश्राम (सुरला) और युवा किसान अविनाश पानघाटे (गोरज) शामिल हैं। वर्ष 2026 में अब तक सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जिले में 64 किसानों ने फसलों की बर्बादी और कर्जबाजारी के कारण आत्महत्या की है। राज्य और देश में किसान आत्महत्याओं के लिए कुख्यात इस जिले में मुख्य रूप से कपास, सोयाबीन और तूर की खेती की जाती है। खरीफ सीजन पूरी तरह बारिश पर निर्भर रहता है।

यवतमाल जिले के उमरखेड़ तहसील के तिवरी परिसर में एक किसान द्वारा मानसिक तनाव के चलते कुएं में कूदकर आत्महत्या करने की घटना 23 अप्रैल की दोपहर सामने आई है। इस घटना से पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है। मृतक किसान का नाम प्रभाकर पुंजाराम खंदारे (उम्र 62 वर्ष, निवासी तिवरी) बताया गया है। जानकारी के अनुसार, वे 20 अप्रैल की सुबह करीब 9 बजे यह कहकर घर से निकले थे कि उमरखेड़ जा रहा हूं, लेकिन वापस नहीं लौटे। इसके बाद उनके बेटे मिलिंद प्रभाकर खंदारे ने उमरखेड पुलिस थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

23 अप्रैल को दोपहर करीब 1 बजे एक रिश्तेदार ने फोन कर सूचना दी कि खेत के कुएं में एक शव तैरता हुआ दिखाई दे रहा है। सूचना मिलते ही मिलिंद खंदारे तुरंत तिवरी पहुंचे। कुएं के पास उन्हें अपने पिता की चप्पल दिखाई दी, जिससे उन्होंने शव की पहचान अपने पिता के रूप में की। घटना की जानकारी मिलते ही ग्राम पुलिस पाटील व पुलिस टीम मौके पर पहुंची। ग्रामीणों की मदद से रस्सी के सहारे शव को कुएं से बाहर निकाला गया। इसके बाद ग्रामीण अस्पताल में डॉक्टरों ने जांच कर प्रभाकर खंदारे को मृत घोषित कर दिया। मौके पर ही पंचनामा और प्राथमिक पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की गई।

प्राथमिक जानकारी के अनुसार, प्रभाकर खंदारे पर खेती का कर्ज था और वे लंबे समय से मानसिक तनाव में थे। साथ ही उनका मानसिक बीमारी का इलाज भी चल रहा था। इसी तनाव के चलते उन्होंने यह कदम उठाया होने की आशंका जताई जा रही है। पुलिस ने आकस्मिक मृत्यु का मामला दर्ज कर लिया है। आगे की जांच पुलिस निरीक्षक शंकर पांचाल के मार्गदर्शन में बीट जमादार दिलीप चव्हाण द्वारा की जा रही है। इस घटना से तिवरी क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई है, वहीं किसानों पर बढ़ते आर्थिक और मानसिक दबाव का मुद्दा एक बार फिर सामने आया है।

बीते कुछ वर्षों से मौसम की अनिश्चितता और लगातार बारिश के कारण फसलें बर्बाद हो रही हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसके अलावा किसानों को फसल ऋण के लिए भटकना पड़ रहा है। गुणवत्तापूर्ण बीज, कीटनाशक और खाद की कमी, फसलों को उचित समर्थन मूल्य न मिलना तथा फसल बीमा का अपेक्षित लाभ न मिलना जैसी समस्याएं किसानों को लगातार परेशान कर रही हैं। बढ़ते कर्ज और नुकसान के कारण किसान मानसिक तनाव में आकर आत्महत्या जैसा कदम उठा रहे हैं।

जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच यवतमाल जिले में 64 किसानों की आत्महत्या दर्ज की गई है। इसके अलावा 24 भूमिहीन किसानों ने भी आत्महत्या की, लेकिन उनके नाम आधिकारिक आंकड़ों में शामिल नहीं किए गए हैं। लगातार बारिश के कारण फसलों को भारी नुकसान हुआ। सरकार ने दो बार मुआवजा दिया, लेकिन यह पर्याप्त नहीं रहा। किसानों का आरोप है कि सिर्फ 50% को ही बैंक से फसल ऋण मिला, जबकि साहूकारों और माइक्रो फाइनेंस समूहों द्वारा शोषण बढ़ा है। खेती की लागत दोगुनी हो चुकी है, जबकि सरकारी सहायता बेहद कम है।

महाराष्ट्र के यवतमाल जिले से एक बार फिर रोंगटे खड़े कर देने वाली खबर सामने आ रही है। किसानों की आत्महत्याओं के लिए कुख्यात इस जिले में संकट कम होने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले 72 घंटों के भीतर मारेगांव तहसील में 3 किसानों ने मौत को गले लगा लिया है। सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो 1 से 25 अप्रैल 2026 के बीच कुल 18 किसान अपनी जीवनलीला समाप्त कर चुके हैं। लगातार फसलों की बर्बादी, कर्ज का बढ़ता बोझ और कृषि नीतियों की खामियों को इस गंभीर स्थिति का मुख्य कारण बताया जा रहा है।

यतवमाल जिला प्रशासन के अनुसार आत्महत्या करने वाले किसानों में कैलास गाडगे (पार्डी), विलास मेश्राम (सुरला) और युवा किसान अविनाश पानघाटे (गोरज) शामिल हैं। वर्ष 2026 में अब तक सरकारी आंकड़ों के मुताबिक जिले में 64 किसानों ने फसलों की बर्बादी और कर्जबाजारी के कारण आत्महत्या की है। राज्य और देश में किसान आत्महत्याओं के लिए कुख्यात इस जिले में मुख्य रूप से कपास, सोयाबीन और तूर की खेती की जाती है। खरीफ सीजन पूरी तरह बारिश पर निर्भर रहता है।

यवतमाल जिले के उमरखेड़ तहसील के तिवरी परिसर में एक किसान द्वारा मानसिक तनाव के चलते कुएं में कूदकर आत्महत्या करने की घटना 23 अप्रैल की दोपहर सामने आई है। इस घटना से पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है। मृतक किसान का नाम प्रभाकर पुंजाराम खंदारे (उम्र 62 वर्ष, निवासी तिवरी) बताया गया है। जानकारी के अनुसार, वे 20 अप्रैल की सुबह करीब 9 बजे यह कहकर घर से निकले थे कि उमरखेड़ जा रहा हूं, लेकिन वापस नहीं लौटे। इसके बाद उनके बेटे मिलिंद प्रभाकर खंदारे ने उमरखेड पुलिस थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

23 अप्रैल को दोपहर करीब 1 बजे एक रिश्तेदार ने फोन कर सूचना दी कि खेत के कुएं में एक शव तैरता हुआ दिखाई दे रहा है। सूचना मिलते ही मिलिंद खंदारे तुरंत तिवरी पहुंचे। कुएं के पास उन्हें अपने पिता की चप्पल दिखाई दी, जिससे उन्होंने शव की पहचान अपने पिता के रूप में की। घटना की जानकारी मिलते ही ग्राम पुलिस पाटील व पुलिस टीम मौके पर पहुंची। ग्रामीणों की मदद से रस्सी के सहारे शव को कुएं से बाहर निकाला गया। इसके बाद ग्रामीण अस्पताल में डॉक्टरों ने जांच कर प्रभाकर खंदारे को मृत घोषित कर दिया। मौके पर ही पंचनामा और प्राथमिक पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की गई।

प्राथमिक जानकारी के अनुसार, प्रभाकर खंदारे पर खेती का कर्ज था और वे लंबे समय से मानसिक तनाव में थे। साथ ही उनका मानसिक बीमारी का इलाज भी चल रहा था। इसी तनाव के चलते उन्होंने यह कदम उठाया होने की आशंका जताई जा रही है। पुलिस ने आकस्मिक मृत्यु का मामला दर्ज कर लिया है। आगे की जांच पुलिस निरीक्षक शंकर पांचाल के मार्गदर्शन में बीट जमादार दिलीप चव्हाण द्वारा की जा रही है। इस घटना से तिवरी क्षेत्र में शोक की लहर फैल गई है, वहीं किसानों पर बढ़ते आर्थिक और मानसिक दबाव का मुद्दा एक बार फिर सामने आया है।

बीते कुछ वर्षों से मौसम की अनिश्चितता और लगातार बारिश के कारण फसलें बर्बाद हो रही हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसके अलावा किसानों को फसल ऋण के लिए भटकना पड़ रहा है। गुणवत्तापूर्ण बीज, कीटनाशक और खाद की कमी, फसलों को उचित समर्थन मूल्य न मिलना तथा फसल बीमा का अपेक्षित लाभ न मिलना जैसी समस्याएं किसानों को लगातार परेशान कर रही हैं। बढ़ते कर्ज और नुकसान के कारण किसान मानसिक तनाव में आकर आत्महत्या जैसा कदम उठा रहे हैं।

जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच यवतमाल जिले में 64 किसानों की आत्महत्या दर्ज की गई है। इसके अलावा 24 भूमिहीन किसानों ने भी आत्महत्या की, लेकिन उनके नाम आधिकारिक आंकड़ों में शामिल नहीं किए गए हैं। लगातार बारिश के कारण फसलों को भारी नुकसान हुआ। सरकार ने दो बार मुआवजा दिया, लेकिन यह पर्याप्त नहीं रहा। किसानों का आरोप है कि सिर्फ 50% को ही बैंक से फसल ऋण मिला, जबकि साहूकारों और माइक्रो फाइनेंस समूहों द्वारा शोषण बढ़ा है। खेती की लागत दोगुनी हो चुकी है, जबकि सरकारी सहायता बेहद कम है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *