आरटीआई ने खोली पोल: भिलाई स्टील प्लांट प्रबंधन को यह तक नहीं पता कि उनके क्वार्टर्स में कौन रह रहा है!

भिलाईनगर: भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) टाउनशिप के प्रबंधन और नगर सेवाएं विभाग (Town Services Department) की बड़ी लापरवाही सामने आई है। आरटीआई (RTI) के तहत किए गए एक खुलासे में पता चला है कि बीएसपी प्रबंधन के पास इस बात का कोई रिकॉर्ड ही नहीं है कि टाउनशिप के हजारों आवासों में कितने अधिकारी और कर्मचारी रह कितने लोग रहे हैं। विभाग के इस गैर-जिम्मेदाराना जवाब के बाद से संयंत्र परिसर में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

सेक्टर-10 की पूर्व पार्षद ने लगाई थी आरटीआई

जानकारी के मुताबिक, सेक्टर-10 की पूर्व पार्षद उपासना साहू ने बीएसपी के नगर सेवाएं विभाग में सूचना के अधिकार (RTI) के तहत आवेदन देकर टाउनशिप के आवासों से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां मांगी थीं।

उन्होंने विभाग के सामने मुख्य तौर पर तीन सवाल रखे थे:

  1. भिलाई इस्पात संयंत्र की कॉलोनी (टाउनशिप) में कुल कितने आवास हैं?
  2. वर्तमान में कितने आवासों में अधिकारी और कर्मचारी निवास कर रहे हैं?
  3. अधिकारी या कर्मचारी वर्ग के कितने रहने योग्य आवास अभी रिक्त (खाली) पड़े हैं?

विभाग ने दिया हैरान करने वाला जवाब

जब नगर सेवाएं विभाग की ओर से इस आरटीआई का लिखित जवाब सामने आया, तो हर कोई हैरान रह गया। विभाग ने पहला आंकड़ा तो दे दिया, लेकिन बाकी के दोनों महत्वपूर्ण सवालों पर पल्ला झाड़ लिया:

  • पहला जवाब: टाउनशिप में कुल आवासों की संख्या 33,327 है।
  • दूसरा जवाब: अधिकारियों या कर्मचारियों के आवासों में निवास करने से संबंधित जानकारी उपलब्ध नहीं है
  • तीसरा जवाब: अधिकारियों या कर्मचारियों के रहने योग्य रिक्त आवासों की कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है

कंपनी आवासों पर से कंट्रोल खो रहा है प्रबंधन?

बीएसपी प्रबंधन को लेकर आम तौर पर यह शिकायतें मिलती रही हैं कि वह आरटीआई के तहत या तो सही जानकारियां नहीं देता या फिर मामलों को टालने की कोशिश करता है। लेकिन आवासों जैसी बुनियादी और अहम जानकारी के अभाव ने यह साबित कर दिया है कि नगर सेवाएं विभाग का टाउनशिप के क्वार्टर्स पर से नियंत्रण कमजोर होता जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आवास आवंटन विभाग के पास यह रिकॉर्ड ही नहीं है कि कौन सा मकान किसे आवंटित है और कितने मकान खाली पड़े हैं, तो इससे टाउनशिप में अवैध कब्जे या आवासों के दुरुपयोग की आशंका काफी बढ़ जाती है।

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