संसद में बवाल के बाद जनरल नरवणे की नई किताब लॉन्च, इस बार भी आर्मी ही है टॉपिक, थरूर से भी कनेक्शन

पूर्व भारतीय सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे(General MM Naravane) की एक किताब को लेकर संसद में हुए विवाद के बाद अब उनकी नई पुस्तक लॉन्च हुई है। खास बात यह है कि यह किताब भी सेना, वायुसेना और नौसेना से जुड़े विषयों पर आधारित है। इससे पहले उनकी अप्रकाशित संस्मरण पुस्तक फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी को लेकर काफी विवाद हुआ था।

नई किताब का नाम द क्यूरियस एंड द क्लासिफाइड: अनअर्थिंग मिलिट्री मिथ्स एंड मिस्ट्रीज है। प्रकाशक रूपा पब्लिकेशंस के अनुसार, इसमें जनरल नरवणे(General MM Naravane) ने भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी कहानियों, रहस्यों और परंपराओं के कई अनछुए पहलुओं को सामने रखा है।

यह पुस्तक सैन्य जगत से जुड़े मिथकों की गहराई से पड़ताल करती है और सैनिकों के साहस व जिज्ञासा को उजागर करती है। इस किताब के पीछे एक दिलचस्प प्रेरणा भी जुड़ी है। दरअसल, दो साल पहले एक मित्र के घर पर नरवणे(General MM Naravane) की नजर कांग्रेस नेता शशि थरूर की किताब अ वंडरलैंड ऑफ वर्ड्स पर पड़ी थी, जिससे उन्हें अपनी नई किताब लिखने का विचार आया। उन्होंने पुस्तक की प्रस्तावना और एक हालिया भाषण में इसका जिक्र भी किया।

इससे पहले उनकी किताब फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी को लेकर विवाद तब बढ़ गया था, जब कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने संसद में इसके कुछ अंशों का हवाला देते हुए सरकार पर निशाना साधा। हालांकि, स्पीकर ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया, यह कहते हुए कि अप्रकाशित किताबों का उल्लेख नहीं किया जा सकता। बाद में पेंग्विन रैंडम हाउस इंडिया ने भी स्पष्ट किया था कि इस संस्मरण के प्रकाशन अधिकार उसके पास हैं और यह पुस्तक अभी प्रकाशित नहीं हुई है।

पूर्व भारतीय सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ को लेकर चल रहे विवाद के बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी पहली प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने लिखा, “पुस्तक की ताजा स्थिति यही है,” इशारा करते हुए कि इस मुद्दे पर अभी स्पष्टता जरूरी है। यह प्रतिक्रिया उनकी किताब फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी के कंटेंट को लेकर चर्चा और विवाद के बाद आई है।

इससे पहले पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने साफ किया था कि इस किताब के प्रकाशन के अधिकार पूरी तरह उसके पास हैं। प्रकाशक ने यह भी स्पष्ट किया कि यह पुस्तक अभी तक न तो प्रिंट और न ही डिजिटल फॉर्मेट में प्रकाशित हुई है। पब्लिशर के अनुसार, किताब की कोई भी प्रति अब तक न छापी गई है, न वितरित की गई है और न ही बिक्री के लिए उपलब्ध कराई गई है।

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