डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर बड़ा ऐलान, छत्तीसगढ़ के हर जिले में लगेगी प्रतिमा

श्यामा प्रसाद मुखर्जी

रायपुर। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर छत्तीसगढ़ सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने घोषणा की कि राज्य के सभी संभागीय और जिला मुख्यालयों में डॉ. मुखर्जी की प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी। इसके लिए सरकार ने 10 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की है।

पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में आयोजित प्रदेश स्तरीय समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जीवन राष्ट्रभक्ति, शिक्षा, त्याग और अखंड भारत के संकल्प का प्रेरणादायी उदाहरण है। उन्होंने कहा कि उनके विचार आज भी देश के विकास और राष्ट्रीय एकता के लिए मार्गदर्शक हैं।

मुख्यमंत्री ने किया श्रद्धापूर्वक नमन

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश डॉ. मुखर्जी के सपनों को साकार करने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि धारा 370 हटाना, अंत्योदय आधारित विकास और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने वाले अनेक फैसले डॉ. मुखर्जी की सोच को साकार करने वाले ऐतिहासिक कदम हैं।

उन्होंने कहा कि डॉ. मुखर्जी ने राष्ट्रहित को हमेशा सर्वोपरि रखा और सिद्धांतों से समझौता करने की बजाय केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा देना स्वीकार किया।

10 करोड़ रुपये से लगेंगी प्रतिमाएं

मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि—

  • सभी संभागीय मुख्यालयों में प्रतिमा स्थापित होगी।
  • सभी जिला मुख्यालयों में भी प्रतिमा लगाई जाएगी।
  • इस कार्य के लिए 10 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं।
  • उद्देश्य नई पीढ़ी को डॉ. मुखर्जी के विचारों और योगदान से परिचित कराना है।

शिक्षा और राजनीति दोनों में बनाया इतिहास

मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी केवल राजनेता ही नहीं, बल्कि एक उत्कृष्ट शिक्षाविद भी थे।

उनकी प्रमुख उपलब्धियां—

  • मात्र 33 वर्ष की आयु में विश्वविद्यालय के कुलपति बने।
  • स्वतंत्र भारत के प्रथम उद्योग मंत्री के रूप में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
  • शिक्षा और राष्ट्र निर्माण को समान महत्व दिया।
  • सिद्धांतों के लिए पद छोड़ने से भी पीछे नहीं हटे।

अखंड भारत के लिए दिया सर्वोच्च बलिदान

मुख्यमंत्री ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में ‘एक देश में दो निशान, दो विधान और दो प्रधान’ की व्यवस्था के विरोध में डॉ. मुखर्जी ने ऐतिहासिक आंदोलन चलाया।

उन्होंने राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। आज पूरा देश उनके त्याग और राष्ट्रसेवा को श्रद्धा के साथ याद करता है।

स्वतंत्रता सेनानियों को सम्मान देने का प्रयास

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के भूले-बिसरे स्वतंत्रता सेनानियों और राष्ट्रनिर्माताओं को उचित सम्मान दिलाने का कार्य किया है।

उन्होंने बताया कि—

  • हर घर तिरंगा अभियान ने राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत किया।
  • नया रायपुर स्थित शहीद वीरनारायण सिंह स्मारक सह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय में छत्तीसगढ़ के 14 वीर स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृति में विशेष दीर्घा बनाई गई है।

अंत्योदय के लक्ष्य पर काम कर रही सरकार

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पंडित दीनदयाल उपाध्याय और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के अंत्योदय के विचारों को आधार बनाकर विकास कार्य कर रही है।

उन्होंने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में सरकार ने कई महत्वपूर्ण कार्य पूरे किए हैं।

प्रमुख उपलब्धियां

  • नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में नियद नेल्लानार योजना के माध्यम से विकास कार्य।
  • 500 से अधिक गांवों तक सड़क, बिजली, पेयजल, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाएं पहुंचीं।
  • 700 से अधिक मोबाइल टावर स्थापित किए गए।
  • बस्तर क्षेत्र में व्यापक स्वास्थ्य परीक्षण और उपचार अभियान संचालित किया जा रहा है।
  • ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में संचार व्यवस्था मजबूत हुई है।

युवाओं से किया विशेष आह्वान

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने युवाओं से अपील की कि वे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के राष्ट्रसेवा, शिक्षा, समर्पण और त्याग के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएं।

उन्होंने कहा कि विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में युवाओं की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका है और डॉ. मुखर्जी का जीवन हर पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।

समारोह में पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सच्चिदानंद शुक्ल, कुलसचिव डॉ. शैलेन्द्र कुमार पटेल, शिक्षक, छात्र-छात्राएं, प्रबुद्धजन और बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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