इजरायल की सेना अब लेबनान में दाखिल हो चुकी है. बीते कई दिनों से एयरस्ट्राइक के जरिए इजरायल ने लेबनान में हिजबुल्लाह के कई ठिकानों को तबाह करने और बड़े नेताओं को मार गिराने के बाद यह कदम उठाया है. इजरायल की ओर से हो रहे लगातार हमलों के चलते लेबनान में हड़कंप है. हजारों की संख्या में लोग देश छोड़कर सीरिया की ओर भाग रहे हैं. लेबनान-सीरिया बॉर्डर पर हालात की जानकारी लेने के लिए आजतक संवाददाता अशरफ वानी वहां पहुंचे. यहां उन्होंने युद्ध और अशांति का दंश झेल रहे कुछ बच्चों से भी बातचीत की…
लेबनान-सीरिया बॉर्डर पर अशरफ वानी ने कुछ बच्चों से बातचीत की. पूछने पर सामने आया कि ये बच्चे यहां मजदूरी करते हैं. भले ही दुनियाभर में बाल मजदूरी को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हों लेकिन इन बच्चों से बात करके समझ आता है कि स्थिति कितनी भयावह है. ये बच्चे लेबनान से पेट्रोल और डीजल ले जाकर सीरिया में लोगों को बेचते हैं. दरअसल, लेबनान में पेट्रोल सस्ता है. इसलिए यहां बड़े पैमाने पर ये धंधा चलता है.
बॉर्डर पर लेबनान से ओर से सीरिया जाने वालों की भारी भीड़ देखने को मिली. अब जब इजरायल ने लेबनान पर जमीनी हमले शुरू कर दिए हैं तो यहां भीड़ बढ़ने लगी है. लोग जान बचाने के लिए भाग रहे हैं. सड़कों पर सन्नाटा है. लोगों में डर का माहौल है. हालात का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि लेबनानी सरकार के दावों की मानें तो इजरायली हमले में अब तक उसके 1000 से अधिक नागरिकों की मौत हुई है और लाखों लोगों को अपने घरों से भागने के लिए मजबूर होना पड़ा है. इजरायली हवाई हमलों के कारण हताहतों की संख्या में वृद्धि के कारण अस्पतालों में मरीजों की भीड़ बढ़ गई है.
इजरायल की नवीनतम कार्रवाइयों से संकेत मिलता है कि उसका लेबनान में हिज्बुल्लाह और यमन में हूती सहित इस क्षेत्र में ईरान समर्थित अन्य मिलिशिया संगठनों के खिलाफ अपने हमले को धीमा करने का कोई इरादा नहीं है. इजरायल ने लेबनान की सीमावर्ती गांवों में जमीनी कार्रवाई शुरू कर दी है और उसके निशाने पर हिज्बुल्लाह के ठिकाने हैं. जहां हिज्बुल्लाह ने इजरायल से अपने नेता हसन नसरल्लाह की हत्या का बदला लेने की कसम खाई है, वहीं लेबनानी सरकार युद्धविराम के लिए राजनयिक रास्ता तलाश रही है.