“जेंडर-बैलेंस्ड काउंसलिंग”
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रायपुर, 29 अप्रैल 2026 — छत्तीसगढ़ का दुर्ग जिला आज एक अभिनव जेंडर-बैलेंस्ड काउंसलिंग मॉडल के लिए राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित हो रहा है। इस पहल ने पारिवारिक विवादों के समाधान में न केवल एक नया दृष्टिकोण पेश किया है, बल्कि सामाजिक समीकरणों को भी नया आकार दिया है। पारंपरिक रूप से महिला मुद्दों तक सीमित रहे पारिवारिक परामर्श केंद्र अब एक व्यापक मंच बन चुके हैं, जो न केवल महिलाओं, बल्कि पुरुषों और बुजुर्गों के मामलों को भी समान रूप से और संवेदनशीलता से संभालते हैं।
पारिवारिक विवाद समाधान की नई दिशा
दुर्ग के सेक्टर-6 स्थित महिला थाना में स्थापित परिवार परामर्श केंद्र, जो पहले सिर्फ महिलाओं की समस्याओं तक ही सीमित था, अब एक जेंडर-बैलेंस्ड काउंसलिंग सिस्टम के रूप में एक महत्वपूर्ण बदलाव का हिस्सा बन चुका है। यहां अब पुरुष और वरिष्ठ नागरिक भी अपनी समस्याओं के समाधान के लिए पहुंचते हैं और उन्हें समान रूप से सुना जाता है।
मुख्य पहल – पुरुष काउंसलर की नियुक्ति
दुर्ग में इस काउंसलिंग सिस्टम की एक अहम विशेषता पुरुष काउंसलर की नियुक्ति है, जो विवादों के समाधान में एक संतुलित दृष्टिकोण प्रदान करता है। हाल के वर्षों में यह देखा गया कि पुरुष भी मानसिक, वैवाहिक, और आर्थिक दबावों से जूझते हैं, जिन्हें समझने और सहानुभूति देने के लिए यह कदम उठाया गया। पुरुष काउंसलर के माध्यम से उनकी समस्याओं का समाधान प्रभावी तरीके से किया जा रहा है, जिससे इस मॉडल की सफलता को और मजबूती मिली है।
सीनियर सिटीज़न सपोर्ट बेंच: बुजुर्गों के लिए संवेदनशील समाधान
दुर्ग जिले का एक और सराहनीय कदम था ‘सीनियर सिटीज़न सपोर्ट बेंच’ का गठन। इस इकाई में रिटायर्ड अधिकारी, मनोवैज्ञानिक और समाजसेवी शामिल हैं, जो बुजुर्गों के मामलों को संवेदनशीलता के साथ सुनते हैं। यहां, बुजुर्गों के खिलाफ हो रहे उत्पीड़न—जैसे बेटे-बहू द्वारा प्रताड़ना, संपत्ति के लिए दबाव, वृद्धाश्रम भेजने का प्रयास, शराब के लिए मारपीट और घर से निकालना—जैसी घटनाएं खुलकर सामने आ रही हैं और उनका समाधान किया जा रहा है।
अब तक, इस केंद्र में करीब 200 शिकायतें दर्ज की जा चुकी हैं, जिनमें से लगभग 130 मामलों का सफल समाधान हो चुका है। यह आंकड़ा साबित करता है कि समय पर संवाद और संवेदनशील हस्तक्षेप कितने प्रभावी हो सकते हैं।
मुख्यमंत्री का समर्थन और एसएसपी की प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे समय की मांग बताया और कहा कि इस प्रकार की काउंसलिंग आधारित समाधान से पारिवारिक विवादों को प्रारंभिक स्तर पर सुलझाया जा सकता है, जिससे समाज में सामंजस्य और स्थिरता बनी रहती है।
दुर्ग के एसएसपी विजय अग्रवाल के अनुसार, यह मॉडल न केवल विवादों को कम कर रहा है, बल्कि परिवारों को टूटने से भी बचा रहा है। संवाद और परामर्श की प्रक्रिया अब पति-पत्नी के बीच बढ़ते विवादों को गंभीर रूप लेने से पहले ही रोकने में मदद कर रही है।
दुर्ग का काउंसलिंग-फर्स्ट मॉडल
दुर्ग का ‘काउंसलिंग-फर्स्ट’ मॉडल छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बन चुका है। जहां कई राज्य पारंपरिक और एकतरफा दृष्टिकोण अपनाते हैं, वहीं दुर्ग ने एक संतुलित और समावेशी मॉडल पेश किया है, जहां महिलाएं, पुरुष और बुजुर्ग सभी को समान रूप से सुना जाता है।
यह मॉडल न केवल पारिवारिक विवादों के समाधान में कारगर साबित हो रहा है, बल्कि यह परिवारों के टूटने को भी रोकने में मदद कर रहा है। दुर्ग का यह प्रयास अब राष्ट्रीय स्तर पर एक प्रभावी उदाहरण बन चुका है, जिसे अन्य राज्य भी अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।
बुलेट पॉइंट्स:
- दुर्ग में जेंडर-बैलेंस्ड काउंसलिंग मॉडल पारिवारिक विवाद समाधान का एक रोल मॉडल बन गया है।
- पुरुष काउंसलर की नियुक्ति से पुरुषों की समस्याओं को भी संवेदनशीलता से सुना जा रहा है।
- सीनियर सिटीज़न सपोर्ट बेंच ने बुजुर्गों के उत्पीड़न के मामलों को संवेदनशीलता से हल किया।
- मुख्यमंत्री और एसएसपी की सराहना से यह पहल और मजबूती पा रही है।
- ‘काउंसलिंग-फर्स्ट’ मॉडल छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों के लिए प्रेरणास्त्रोत बन चुका है।