डीवाई चंद्रचूड़ नहीं बनना चाहते थे जज, फिर ऐसा क्या हुआ कि CJI तक बन गए

डीवाई चंद्रचूड़ रिटायर हो चुके हैं। इसके साथ ही उनके करीब 25 साल के ज्यूडिशियल करियर का अंत भी हो चुका है। जस्टिस चंद्रचूड़ अपने तमाम चर्चित फैसलों के लिए जाने जाएंगे। लेकिन बरसों पहले डीवाई चंद्रचूड़ एक ऐसा फैसला लेने जा रहे थे, जिसके बाद वह कभी जज की कुर्सी तक पहुंच ही नहीं पाते। यह वाकया है साल 2000 का और इसमें एक बड़ी भूमिका उस वक्त बॉम्बे हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस वाईके सबरवाल की भी है। आइए जानते हैं आखिर क्या है वो मशहूर किस्सा…

असल में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम उस वक्त सीनियर एडवोकेट डीवाई चंद्रचूड़ का नाम हाई कोर्ट के जज के लिए रेकमेंड करने में देरी कर रहा था। इस बात से डीवाई चंद्रचूड़ काफी निराश थे। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक एक दिन नाराजगी में उन्होंने फैसला किया कि अब वह जज बनेंगे ही नहीं। चंद्रचूड़ बॉम्बे हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस सबरवाल के चेम्बर में पहुंचे और अपने फैसले के बारे में बताया। उन्होंने कहाकि उन्हें जज नहीं बनना और वह अपना नाम वापस लेना चाहते हैं।

यह सुनकर जस्टिस सबरवाल ने उन्हें एक सलाह दी। उन्होंने डीवाई चंद्रचूड़ से एक हफ्ते तक इंतजार करने के लिए कहा। बाद में 29 मार्च, 2000 को डीवाई चंद्रचूड़ बॉम्बे हाई के जज नियुक्त किए गए। इसके बाद से जो कुछ वह इतिहास है। अपने फिक्स रूटीन और लगातार योगा के चलते जस्टिस चंद्रचूड़ रिटायरमेंट के दिन तक सदाबहार बने रहे। यहां तक तमाम सीनियर एडवोकेट्स और जजेज उनसे इसका सीक्रेट पूछते रहते हैं।

भारत के अगले प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना ने शुक्रवार को सीजेआई डी.वाई. चंद्रचूड़ की उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सराहना की। उन्होंने कहाकि जस्टिस चंद्रचूड़ ने सुप्रीम कोर्ट को बेहतर बनाने के मिशन पर काम किया। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) द्वारा न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ के लिए आयोजित विदाई समारोह में जस्टिस खन्ना ने भावनात्मक भाषण में कहाकि उनके पद से हटने से उच्चतम न्यायालय में एक खालीपन आ जाएगा। उन्होंने आगे कहाकि संवैधानिक पीठ के 38 फैसले, जिनमें से दो आज सुनाए गए। यह एक ऐसा रिकॉर्ड है जो कभी नहीं टूटेगा।

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