झांसी अग्निकांड में मेडिकल कॉलेज प्रशासन की लापरवाही? टंगे रह गए फॉयर एक्सटीन्गुइशर; अलार्म भी नहीं बजा

यूपी के झांसी मेडिकल कॉलेज अग्निकांड के बाद मेडिकल कॉलेज प्रशासन की लापरवाही की बातें सामने आ रही है। अब पता चला है कि हादसे वाले वार्ड के आसपास जो फॉयर एक्सटीन्गुइशर लगे थे वे टंगे ही रह गए। इनका इस्‍तेमाल ही नहीं हो पाया। यही नहीं बताया जा रहा कि आग लगने के वक्‍त सेफ्टी अलार्म भी नहीं बजा। अलार्म बजा होता तो बचाव कार्य तेजी से शुरू किया जा सकता था जिससे बच्‍चों की जान बच सकती थी। इन सब चर्चाओं के बीच सरकार ने आग लगने के कारणों की जांच का आदेश दे दिया है। डिप्‍टी सीएम बृजेश पाठक ने झांसी में बताया कि मजिस्‍ट्रेटी जांच के साथ-साथ विभागीय जांच भी कराई जा रही है ताकि इस घटना की तह तक पहुंचा जा सके और भविष्‍य में ऐसी घटना की पुनरावृति न हो।

अचानक लगी आग

प्रथमदृष्‍टया झांसी मेडिकल कॉलेज में आग लगने की वजह शार्ट सर्किट बताई जा रही है। डिप्‍टी सीएम बृजेश पाठक ने कहा कि शार्ट सर्किट से आग लगी। उन्‍होंने कहा कि आग लगने के कारणों की गहनता से जांच की जाएगी। वहीं हादसे के बाद कुछ प्रत्‍यक्षदर्शियों का कहना था कि आग ऑक्सीजन कंसंट्रेटर से लगी। देर रात अस्पताल के प्रबंधन से जुड़े एक अधिकारी ने कहा कि आग कंसंट्रेटर से लगने की बात सामने आ रही है। इसकी जांच कराई जाएगी। उन्होंने सफाई दी कि वार्ड में कोई 56 बच्चों के होने की बात कह रहा है तो कोई 70 बच्चों की। यह सूचनाएं गलत हैं। वार्ड में 47 बच्चे थे। उनमें से 10 बच्चों को बचाया नहीं जा सका। 37 बच्चों का उपचार किया जा रहा है। डीएम खुद बच्चों के रेस्क्यू और इलाज की मॉनीटरिंग कर रहे हैं।

..जिंदा हो या मृत हमारा बच्चा हमें लाटाओ दो

मेडिकल कॉलेज के स्पेशल न्यू बॉर्न केयर यूनिट (एसएनसीयू) निक्कू वार्ड में भड़की आग ने न सिर्फ मांओं को गोद उजाड़ दी। बल्कि घरों के आंगन में पहुंचने से पहले खुशियों भरे जलकर राख हो गई। शनिवार को लापता शिशुओं के मम्मी-पापा फूट-फूटकर रो रहे थे। दादा-दादी, नाना-नानी की आंखूं सूख चुकी थीं। वह नाती-नातिन का मुंह नहीं देख सके।

शनिवार मलबा में गुजरे, अफसरों से चीख-चीख कर लोग एक ही पुकार लगा रहे थे। साहब, तुम्हारे हाथ जोड़ रहे हैं। पैर पड़ रहे हैं। ..जिंदा हो या मृत, ..हमारा बच्चा हमें लौटा दो। ..बड़ी कृपा होगा? बड़े दिनों बाद बच्चे का मुंह देखा था। बड़ी मन्नतें मांगी थीं। लेकिन, आग ने सबकुछ जला दिया। रूंहें कंपा देने वाली आंहों के बीच दिन के दिन की शुरूआत दर्दभरी-रोती-बिलखती आवाजों के बीच हुई। राजगढ़ निवासी नैंसी की कुछ समय पहले डिलेवरी हुई थी तो बेटे की खुशी में पूरा घर झूम रहा था। तभी उसकी हालत खराब होने पर 10 नवंबर को नवजात शिशु के गहन चिकित्सा कक्ष (एसएनसीय)े निक्कू में भर्ती कराया था। शुक्रवार की रात आग के बाद शिशु लापता है। नैंसी उसके परिजनों की आंखों से आंसू नहीं थम रहे। वह एक ही शब्द दोहरा रहे हैं। जैसा भी हो बच्चा दे दे। महोबा के गांव परसा निवासी कुलदीप की पत्नी नीलू का बेटा भी गायब है। 9 नवंबर को बच्चे को महोबा में ही जन्म दिया था। बीते मंगलवार को मेडिकल के निक्कू वार्ड में भर्ती कराया था। 7 दिन ही मां बच्चे को दूर पिला पाई और बीती रात हुए हादसे के अब तक बच्चे की शक्ल देखने को नहीं मिली।

साहब, चार बच्चों की बचाई जान, खुदका नहीं मिला

महोबा निवासी कुलदीप ने बताया कि सात दिन का बेटा था। जब आग लगी तो भगदड़ मच गई। कलेजे टुकड़े को अभी सही तरह से कलेजे भी नहीं लगा पाए थे कि आग ने सबकुछ लील लिया। चार नवजात शिशुओं की जान बचाई। पता नहीं था कि उनके कौन किसका बच्चा है। लेकिन, अपना स्वयं का बच्चा देखने को नहीं मिला। अब तक लापता है।

कहां हैं पांच से सात बच्चे

शुक्रवार की रात आग ने अरमान ही नहीं जलाए बल्कि शनिवार सुबह तक करीब सात बच्चों का कहीं पता नहीं चला। जिसको लेकर परिजन बिलख पड़े। कई तो छोड़कर ही भाग गए। उनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। सुबह 11.30 बजे करीब रोते-बिलखते लोगों ने हंगामा करना भी शुरू किया। बताया जा रहा है कि ऑक्सीजन कंसंट्रेटर में स्पार्किंग के चलते आग लगी, फिर धमाका हो गया। ऑक्सीजन, नाइट्रोजन का रखा सिलेंडर फटा। फिर पूरा अस्पताल दहल उठा।

सात की हालत अति-नाजुक

मुख्य चिकित्साधिकारी डा. सुधाकर पांडेय ने बताया कि स्पेशल न्यू बॉर्न केयर यूनिट में भर्ती बच्चों को मेडिकल कॉलेज में इमरजेंसी में शिफ्ट किया गया है। कुछ को जिला व निजी अस्पताल भिजवाया गया। सूत्रों की मानें तो छह दिन के प्रसूता व शिशु को जिला अस्पताल लाया गया है। वहीं प्राइवेट अस्पताल में चार बच्चों को भर्ती कराया है। जिसमें से तीन को ऑक्सीजन सपोर्ट शनिवार दोपहर तक रखा गया है।

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