POS मशीन हुई चालू, अब किसानों को बिना परेशानी मिल रहा उर्वरक, कृषि विभाग ने दी बड़ी जानकारी

POS मशीन

उत्तर बस्तर कांकेर जिले में सहकारी समितियों में उर्वरक वितरण को लेकर सामने आई खबरों के बाद कृषि विभाग ने स्थिति स्पष्ट की है। विभाग के अनुसार अब पीओएस (POS) मशीन पूरी तरह सुचारू रूप से काम कर रही है और किसानों को नियमित रूप से खाद एवं उर्वरक का वितरण किया जा रहा है।

हाल ही में दैनिक समाचार पत्र में “सहकारी समितियों में कर्मचारियों की मनमानी” शीर्षक से खबर प्रकाशित हुई थी, जिसके बाद कृषि विभाग ने पूरे मामले पर विस्तृत जानकारी साझा की।


क्या था पूरा मामला?

कृषि विभाग के उप संचालक जितेंद्र कोमरा ने बताया कि आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित कोयलीबेड़ा में कुल 6 कर्मचारी पदस्थ हैं। 25 मई को इनमें से 3 कर्मचारी कार्यालय में उपस्थित थे, जबकि अन्य कर्मचारी अलग-अलग कारणों से अनुपस्थित रहे।

अनुपस्थित कर्मचारियों के कारण

  • समिति प्रबंधक सुबरन सिंह नाग को रायपुर जाना पड़ा क्योंकि चारगांव समिति की POS मशीन खराब हो गई थी और नई मशीन लानी थी।
  • लिपिक शोभीराम आंचले अवकाश पर थे।
  • लिपिक अश्वन कुमार पटेल अपनी पत्नी के इलाज के कारण देर से कार्यालय पहुंचे।
  • ऑपरेटर विपिन कुमार उसेण्डी कृषि विज्ञान केंद्र कांकेर में आयोजित बैठक में शामिल हुए थे।

हालांकि कार्यालय में ऑपरेटर श्रीमती देवंतीन बघेल और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी उपस्थित थे।


क्यों रुका था उर्वरक वितरण?

25 मई को ऑनलाइन सोसायटी मॉड्यूल में उर्वरक का स्टॉक दिखाई नहीं दे रहा था। इसके अलावा POS मशीन में रजिस्ट्रेशन नंबर दर्ज करने के बाद आगे की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही थी।

इसी तकनीकी समस्या के कारण किसानों को उस दिन उर्वरक वितरण नहीं किया जा सका।


अब स्थिति सामान्य

कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि 26 मई से POS मशीन पूरी तरह ठीक तरीके से काम कर रही है।

अब किसानों को मिल रही हैं ये सुविधाएं:

  • खाद और उर्वरक का नियमित वितरण
  • ऑनलाइन स्टॉक अपडेट
  • तेज और पारदर्शी प्रक्रिया
  • किसानों को कम समय में सेवा

विभाग का कहना है कि तकनीकी समस्या दूर होते ही वितरण प्रक्रिया सामान्य कर दी गई।


किसानों को राहत

POS मशीन के सुचारू रूप से शुरू होने के बाद किसानों को बड़ी राहत मिली है। खरीफ सीजन को देखते हुए खाद और उर्वरक की मांग लगातार बढ़ रही है। ऐसे में समय पर वितरण किसानों के लिए बेहद जरूरी माना जा रहा है।

कई किसानों ने उम्मीद जताई है कि आगे इस तरह की तकनीकी दिक्कतें दोबारा नहीं आएंगी ताकि खेती का काम प्रभावित न हो।


प्रशासन की निगरानी जारी

कृषि विभाग ने बताया कि सभी सहकारी समितियों की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। जहां भी तकनीकी समस्या या स्टाफ की कमी सामने आती है, वहां तुरंत कार्रवाई की जाएगी।

विभाग का उद्देश्य किसानों को बिना किसी परेशानी के समय पर खाद और उर्वरक उपलब्ध कराना है।


डिजिटल सिस्टम से बढ़ी पारदर्शिता

POS मशीन के जरिए उर्वरक वितरण में पारदर्शिता बढ़ी है। इससे:

  • फर्जी वितरण पर रोक लगती है
  • स्टॉक की सही जानकारी मिलती है
  • किसानों का रिकॉर्ड सुरक्षित रहता है
  • वितरण प्रक्रिया तेज होती है

कृषि विभाग का मानना है कि डिजिटल व्यवस्था से किसानों को भविष्य में और बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।

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