दुनियाभर में उखड़ गईं सत्तारूढ़ सरकारें, भारत में कैसे अपवाद साबित हुए PM मोदी? फरीद जकारिया ने समझाया

वरिष्ठ पत्रकार और जियोपॉलिटिकल एक्सपर्ट फरीद जकारिया का कहना है कि ऐसे समय में जब दुनियाभर में उथल-पुथल मची हुई है और कई देशों में सरकारें बदली हैं. ऐसे में भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी की है. उनकी ये जीत एक तरह का अपवाद ही है.

इंडिया टुडे के साथ इंटरव्यू में जब जकारिया से पूछा गया कि पिछले कुछ समय में दुनियाभर के देशों में सरकारें बदली हैं. अमेरिका, ब्रिटेन और अन्य देश में मतदाताओं ने सत्तारूढ़ सरकारों को सिरे से नकार दिया है. लेकिन भारत में ऐसा क्यों देखने को नहीं मिला? इस पर जकारिया ने कहा कि दुनिया की लगभग हर सत्तारूढ़ सरकार को चुनावों में झटका लगा है. लेकिन पीएम मोदी एक अपवाद हैं. भारत में मल्टी पार्टी सिस्टम हैं, जिसने लोकसभा चुनाव में पीएम मोदी की जीत में महत्वपूर्ण  भूमिका निभाई.

उन्होंने कहा कि भारत में अमेरिका की तरह दो राजनीतिक दलों वाला सिस्टम नहीं है. अगर भारत में दो पार्टियों वाला सिस्टम होता तो नतीजे कुछ और हो सकते थे. लेकिन मल्टी-पार्टी सिस्टम में एंटी इनकंबेंसी वोट आमतौर पर दो या तीन बड़ी पार्टियों में बंट जाता है.

उन्होंने कहा कि पीएम मोदी की सत्ता में लगातार वापसी का एक अन्य बड़ा कारण उनकी अपार लोकप्रियता और बाहरी के तौर पर उनकी छवि है. जकारिया ने कहा कि मोदी की लोकप्रियता अपार है. वह तमाम मुद्दों के बावजूद लोगों का विश्वास जीतने में कामयाब रहे हैं और उनके साथ कनेक्शन बनाने में सफल रहे हैं.

वहीं, लोग अभी भी मोदी को बाहरी शख्स के तौर पर देखते हैं. एक ऐसे शख्स के तौर पर जो राजनीतिक वर्ग से नहीं है बल्कि इस वर्ग के बाहर से आकर अपनी पहचान बनाई है. ये पीएम मोदी की सफलता ही है कि दस साल तक प्रधानमंत्री रहने के बाद भी उन्हें बाहरी के तौर पर ही देखा जा सकता है.

‘पीएम मोदी ने पकड़ी हिंदू गौरव की नब्ज’

इससे पहले इस साल की शुरुआत में जकारिया ने कहा था कि पीएम मोदी ने भारतीयों के एक बड़े वर्ग की हिंदू गौरव की नब्ज को समझ लिया है. वे एक सामान्य हिंदू के मन में पैदा होने वाले गौरव को समझते हैं. पीएम भारत के एलीट वर्ग के बाहर से आते हैं. वह पहले नॉन इलीटिस्ट प्रधानमंत्री हैं. आप नेहरू, गांधी परिवार, नरसिम्हा राव यहां तक की मनमोहन सिंह के बारे में सोचें तो वे सभी शिक्षा के आधार पर एक खास प्रकार की एलिट पृष्ठभूमि से आते थे, लेकिन नरेंद्र मोदी एक सामान्य हिंदू की नब्ज को समझते हैं.

जकारिया ने कहा कि वे चाहते हैं कि वो इसका इस्तेमाल पॉजिटिव रूप में करें न कि लोगों को अलग-थलग करने में करें, वह इसका उपयोग सभी को ऊपर लाने के लिए कर सकते हैं. वह भारत के एक बड़े हिस्से के गौरव को भुनाने में सक्षम हैं. 

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