कौन हैं ज्ञानी हरप्रीत सिंह, केंद्र ने क्यों वापस ले ली Z कैटगरी की सुरक्षा; BJP-RSS से क्या कनेक्शन

केंद्र सरकार ने सिख समुदाय के चौथे तख्त श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह को दी गई जेड श्रेणी की सुरक्षा वापस ले ली है। हालांकि, उन्हें पंजाब पुलिस और SGPC द्वारा प्रदान की गई सुरक्षा मिलती रहेगी। जून 2022 में जब वह अकाल तख्त के कार्यवाहक जत्थेदार थे, तब केंद्र सरकार ने उन्हें CRPF की जेड सुरक्षा कवच प्रदान की थी। इस कैटगरी में 21 पुलिसकर्मी शामिल थे। उस वक्त पंजाब सरकार ने उन्हें सुरक्षा देने में टालमटोल की थी और उनकी सुरक्षा घटा दी थी। अब सीआरपीएफ के उन जवानों को वापस जाने का आदेश दिया गया है।

ऐसा माना जा रहा है कि उन्होंने खुद केंद्र सरकार से लिखित में जेड कैटगरी की सुरक्षा वापस लेने को कहा था, क्योंकि उन पर आरएसएस और भाजपा नीत केंद्र सरकार के नेताओं के साथ नजदीकी होने के आरोप लगे थे, जिसके बाद विवाद खड़ा हो गया था। पूर्व अकाली नेता विरसा सिंह वल्टोहा ने ज्ञानी हरप्रीत सिंह पर भाजपा और संघ के नेताओं के साथ सांठगांठ करने के आरोप लगाए थे। इसके बाद पिछले महीने सिंह ने श्री दमदमा साहिब के जत्थेदार पद से इस्तीफा देने की घोषणा की थी, जिसे शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने नामंजूर कर दिया था।

इसके साथ ही SGPC ने शिरोमणि अकाली दल के पूर्व नेता विरसा सिंह वल्टोहा को मर्यादा में रहने की हिदायत भी दी थी। ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने वल्टोहा पर आरोप लगाया था कि वह उन्हें बार-बार निशाना बना रहे हैं। उन्होंने तब एक वीडियो जारी कर पंजाब सरकार और केंद्र सरकार से सुरक्षा वापस लेने की भी मांग की थी। उन्होंने तर्क दिया था कि जब उनके पास कोई पद नहीं है तो उन्हें इतना भारी भरकम सुरक्षा की जरूरत नहीं है।

तख्त दमदमा साहिब सिखों के पांच तख्त में से एक है। यह बठिंडा जिले के तलवंडी साबो में है। ज्ञानी हरप्रीत सिंह इसी तख्त के जत्थेदार हैं। साल 2022 में पंजाब सरकार ने उनकी सुरक्षा से आधे कर्मचारी वापस ले लिए थे। जिसके बाद उन्होंने कहा था कि उन्हें सुरक्षा की कोई जरूरत नहीं है। इसके बाद केंद्र सरकार ने उन्हें सीआरपीएफ की जेड कैटिगरी की सुरक्षा मुहैया कराई थी।

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