दिल्ली विधानसभा चुनाव होने में तीन महीने का वक्त बचा है, उससे पहले नेताओं का दल बदल शुरू हो गया है और टिकट को लेकर दावेदारी भी तेज हो गई है. दिल्ली न्याय यात्रा के ऐलान के अगले ही दिन कांग्रेस की पार्षद और उनके पति ने आम आदमी पार्टी ज्वाइन कर ली. हरियाणा चुनाव के वक्त कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के बीच गठबंधन नहीं बन पाया था लिहाजा हरियाणा चुनाव के नतीजे आने के तुरंत बाद दिल्ली में गठबंधन नहीं करने का ऐलान आम आदमी पार्टी की तरफ से कर दिया गया ताकि दिल्ली चुनाव में कांग्रेस दबाव में रहे.
मंगलवार को चौहान बांगर से पार्षद शगुफ्ता चौधरी अपने शौहर जुबेर के साथ आम आदमी पार्टी ज्वाइन कर ली. शगुफ्ता पांच बार की कांग्रेस विधायक हैं. वो मतीन अहमद के बेटे जुबेर अहमद की पत्नी हैं. चौहान बांगर वार्ड नंबर 227 से कांग्रेस के टिकट पर शगुफ्ता चौधरी पार्षद बनी थी.
तो वहीं सीलमपुर में टिकट कटने की आशंका को देखते हुए आम आदमी पार्टी के विधायक अब्दुल रहमान ने अल्पसंख्यक सेल से इस्तीफा का ऐलान कर दिया. सूत्रों से पता चला है कि ऐसा अब्दुल रहमान की प्रेशर पॉलिटिक्स के कारण हुआ है.
कांग्रेस के पूर्व विधायक मतीन अहमद के बेटे जुबेर अहमद आम आदमी पार्टी में शामिल हुए और आप के मुखिया अरविंद केजरीवाल से मुलाकात की. इसके बाद आम आदमी पार्टी ने सोशल मीडिया हैंडल ‘X’ पर लिखा कि आगामी दिल्ली चुनाव से पहले आम आदमी पार्टी और मजबूत हो गई है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और जिला अध्यक्ष बाबरपुर चौधरी, जुबेर अहमद और पार्षद शगुफ्ता चौधरी आप के संयोजक अरविंद केजरीवाल से मुलाकात कर आम आदमी पार्टी में शामिल हो गए.
अब ये कयास लगाया जा रहा है कि मुस्लिम बहुल सीलमपुर से दिल्ली विधानसभा चुनाव में पार्टी जुबेर को टिकट दे सकती है और अगर ऐसा हुआ तो मौजूदा विधायक अब्दुल रहमान का टिकट कट जाएगा. यहीं वजह है कि जुबेर की एंट्री के समय ही रहमान ने इस्तीफा की बात कहकर हलचल मचा दी. हालांकि मौजूदा विधायक अब्दुल रहमान ने अल्पसंख्यक सेल से इस्तीफा दे दिया है.
दिल्ली प्रदेश कांग्रेस को एक बड़ा झटका लगा है, जिसके मौजूदा 9 पार्षदों में से अब सिर्फ 8 बचे हैं. दूसरी तरफ दिल्ली प्रदेश कांग्रेस को लगता है कि मुस्लिम बहुल सीटों और सुरक्षित सीटों पर चुनौती कम होगी और उन सीटों को आसानी से जीती जा सकता है.